69000 शिक्षक भर्ती विवाद फिर गरमाया: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज लखनऊ में करेंगे बड़ा प्रदर्शन

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज लखनऊ में करेंगे बड़ा प्रदर्शन

69000 शिक्षक भर्ती मामला फिर सुर्खियों में

उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़ा मामला एक बार फिर गरमा गया है। लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज यानी 2 फरवरी 2026 को लखनऊ में धरना-प्रदर्शन करने जा रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं कर रही है, जिससे उनका संघर्ष लगातार लंबा खिंचता जा रहा है।


विधानसभा घेराव की चेतावनी

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे विधानसभा घेराव तक का कदम उठा सकते हैं। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके परिजन भी शामिल होने की संभावना है, जिससे प्रदर्शन का दायरा और बड़ा हो सकता है।


सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला

69000 शिक्षक भर्ती से जुड़ा यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इस केस की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में हुई थी, लेकिन इसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख मिलती रही है। अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को तय की गई है। सुनवाई से पहले ही अभ्यर्थी अपने आक्रोश का इजहार करने के लिए सड़कों पर उतरने जा रहे हैं।


आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है?

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मामले को सुलझाने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में भी केवल तारीखें मिल रही हैं, समाधान नहीं।

उन्होंने बताया कि 2 फरवरी से आंदोलन की शुरुआत की जा रही है और इसके लिए सभी जिला कोऑर्डिनेटरों को निर्देश दिए गए हैं। ब्लॉक स्तर पर अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की सूची तैयार की गई है, ताकि आंदोलन को संगठित और प्रभावी बनाया जा सके।


प्रदर्शकारियों में क्यों है इतना गुस्सा?

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि इस मामले में कई संवैधानिक और कानूनी संस्थाएं उनके पक्ष में फैसला दे चुकी हैं।
उनका दावा है कि:

  • राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट

  • मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट

  • लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच का फैसला

सब उनके हक में हैं। इसके बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे पिछड़े और दलित समाज से आते हैं, इसलिए उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।


छह साल से जारी है संघर्ष

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने बताया कि वे पिछले छह वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। कई बार सरकार से गुहार लगाई गई, लेकिन उनकी आवाज नहीं सुनी गई। लंबे समय से अनिश्चितता और बेरोजगारी झेल रहे अभ्यर्थी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।


निष्कर्ष

69000 शिक्षक भर्ती मामला अब केवल भर्ती का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य और सामाजिक न्याय से जुड़ा सवाल बन चुका है। आज होने वाला प्रदर्शन इस संघर्ष को एक नई दिशा दे सकता है। अब सबकी नजर सरकार और आने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है।

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