बीड में दिल दहला देने वाली घटना
महाराष्ट्र के बीड जिले के लिंबारूई इलाके में एक 24 वर्षीय महिला ने अपने पति से नया मोबाइल फोन न दिलाए जाने के विवाद के बाद अपने साढ़े तीन साल के बेटे के साथ कुएं में छलांग लगाकर जीवन समाप्त कर लिया। इस घटना ने पूरे इलाके को शोक में डाल दिया है और स्थानीय समाज में चर्चा का विषय बन गई है।
मृतकों की पहचान और घटना का विवरण
मृतक महिला की पहचान प्राजक्ता उर्फ राधा रामेश्वर दराडे के रूप में हुई है। उनके साथ कुएं में कूदकर जान गंवाने वाले उनके बेटे का नाम वेदांत (3 साल 5 महीने) बताया गया है।
स्थानीय पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्राजक्ता कुछ दिनों से अपने पति रामेश्वर बाबासाहेब दराडे से नया मोबाइल फोन दिलाने की मांग कर रही थीं। पति द्वारा मोबाइल न दिलाने पर दोनों के बीच विवाद हुआ और गुस्से के आवेश में प्राजक्ता ने अपने मासूम बेटे के साथ कुएं में छलांग लगा दी।
पुलिस जांच में खुलासा
यह घटना 31 दिसंबर 2025 को हुई थी। शुरुआत में पुलिस ने इसे आकस्मिक मृत्यु (ADR) के रूप में दर्ज किया। लेकिन गहन जांच और पति के बयान के बाद मामला सामने आया।
31 जनवरी 2026 को इस मामले में विस्तृत FIR दर्ज की गई। पुलिस ने मृत मां प्राजक्ता के खिलाफ हत्याकांड का मामला दर्ज किया, जिसमें आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को पानी में डुबोकर मार दिया।
बीड ग्रामीण थाना के पुलिस निरीक्षक अशोक मुदिराज मामले की आगे की जांच कर रहे हैं।
इलाके में शोक और सामाजिक प्रभाव
स्थानीय लोग और पड़ोसी इस घटना से गहरे सदमे में हैं। लिंबारूई परिसर के लोग इस दुःखद घटना से झकझोर गए हैं। एक मामूली मोबाइल फोन के लिए दो जिंदगियों का इस तरह समाप्त होना समाज के लिए चेतावनी बन गया है।
विशेषज्ञ और समाजशास्त्री इस घटना को मानसिक तनाव, गुस्से पर नियंत्रण की कमी और छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर देखने की प्रवृत्ति का परिणाम बता रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल छोटे विवाद और अनियंत्रित क्रोध के कारण लोग संकट का सामना करने में असमर्थ हो जाते हैं। इस तरह की घटनाएं मानसिक स्वास्थ्य और परिवारिक तनाव के प्रति समाज को सतर्क करती हैं।
साथ ही, विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि तनाव, नाराजगी और छोटी बातों पर अनियंत्रित प्रतिक्रिया के बजाय मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लें।
निष्कर्ष
बीड की यह घटना हमें यह संदेश देती है कि छोटी-छोटी मांगों और गुस्से पर नियंत्रण न होने के कारण गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। प्रशासन और समाज को मिलकर मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक तनाव को समझने और सुधारने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है।