जम्मू-कश्मीर: चिनाब नदी में पहली बार ड्रेजिंग शुरू, बिजली स्टेशनों की क्षमता में होगा इजाफा

चिनाब नदी में पहली बार ड्रेजिंग शुरू, बिजली स्टेशनों की क्षमता में होगा इजाफा

चिनाब नदी में ड्रेजिंग की शुरुआत, बिजली उत्पादन में सुधार की उम्मीद
जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित सलाल पावर स्टेशन पर चिनाब नदी में पहली बार ड्रेजिंग (गाद निकालने) का काम शुरू किया गया है। यह ऐतिहासिक कदम सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद उठाया गया है, जिससे हिमालयी नदियों के प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। इस ड्रेजिंग प्रक्रिया से न केवल नदी की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि इससे बिजली उत्पादन की क्षमता भी बेहतर होगी।

संधि के निलंबन के बाद बदलाव
सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद, अब जम्मू-कश्मीर में नदी और जल स्रोतों के प्रबंधन में नई दिशा दी जा रही है। इस संदर्भ में, चिनाब नदी में ड्रेजिंग और गाद निकालने का कार्य केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया है। पहले, संधि के प्रावधानों के तहत कुछ गेटों को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया था, लेकिन अब इन्हें फिर से खोला जा रहा है। इस कदम से नदियों की परिचालन क्षमता और जल विद्युत परियोजनाओं की कार्यक्षमता में वृद्धि की संभावना है।

सलाल पावर स्टेशन में ड्रेजिंग की प्रक्रिया
सलाल पावर स्टेशन के कार्यकारी निदेशक अनीश गौराहा के अनुसार, इस ड्रेजिंग प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य नदी से अधिक से अधिक गाद निकालना है, जिससे पावर स्टेशन की मशीनरी पर होने वाली दबाव को कम किया जा सके। इससे विद्युत उत्पादन में भी सुधार होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि, कितना सुधार होगा, यह अभी कहना मुश्किल है।

अनीश गौराहा ने बताया कि अब एक प्रभावी गाद प्रबंधन योजना के तहत गाद निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जो पहले सिंधु जल संधि के कारण नहीं की जा सकती थी। इस योजना के तहत फ्लशिंग के माध्यम से गाद को हटाने की प्रक्रिया पर भी काम चल रहा है, जिससे मशीनों की उम्र बढ़ने और कार्यक्षमता में सुधार होगा।

पावर स्टेशनों की कार्यक्षमता में सुधार
सलाल पावर स्टेशन के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि इस ड्रेजिंग प्रक्रिया से पावर स्टेशन के जीवनकाल में वृद्धि हो सकती है। जब तक सिंधु जल संधि लागू थी, तब तक गाद को निकालने या ‘ड्रॉ-डाउन फ्लशिंग’ जैसी प्रक्रिया पर पाबंदी थी। संधि के निलंबन के बाद, अब इन तकनीकी प्रतिबंधों को हटा लिया गया है, जिससे बिजली उत्पादन में सुधार के साथ-साथ मशीनों के खराब होने की संभावना कम हो जाएगी।

संधि के प्रभावी निलंबन से मिली राहत
अनीश गौराहा ने यह भी बताया कि सिंधु जल संधि के प्रभावी रहने तक इन तकनीकी गतिविधियों को रोक दिया गया था। इसके कारण कई महत्वपूर्ण गेटों को बंद रखना पड़ा था। लेकिन अब, संधि के निलंबन के बाद इन गेटों को फिर से खोला जा रहा है, जिससे गाद निकालने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। इस कदम से गाद प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार होगा और बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि की उम्मीद है।

उम्मीदें और भविष्य की योजनाएं
अब, केंद्र सरकार और विद्युत विभाग दोनों ही इस प्रक्रिया को लेकर आशान्वित हैं। ड्रेजिंग और गाद प्रबंधन के कार्यों से विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ नदी की जल धाराओं को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे न सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बेहतर होगा।

निष्कर्ष
चिनाब नदी में ड्रेजिंग की शुरुआत एक ऐतिहासिक कदम है, जो जम्मू-कश्मीर में बिजली उत्पादन और नदी प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद यह पहल न केवल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि करेगी, बल्कि इससे स्थानीय समुदायों के लिए भी लाभकारी साबित होगी। भविष्य में इस तरह के और सुधारात्मक कदम उठाए जाने की संभावना है, जो राज्य के समग्र विकास में योगदान देंगे।

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