कानपुर लैम्बोर्गिनी जब्ती मामला: 8.83 करोड़ के बॉन्ड पर 12 करोड़ की सुपरकार 20 दिन बाद रिहा

8.83 करोड़ के बॉन्ड पर 12 करोड़ की सुपरकार 20 दिन बाद रिहा

हाई-प्रोफाइल केस में CJM कोर्ट का बड़ा आदेश

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 12 करोड़ रुपये कीमत की एक लग्जरी लैम्बोर्गिनी कार को करीब 20 दिन बाद उसके मालिक को वापस सौंप दिया गया। यह रिलीज तब संभव हुई जब मालिक ने 8.83 करोड़ रुपये का सिक्योरिटी बॉन्ड भरा। मामले में दो अदालतों द्वारा सुनवाई से अलग होने के बाद अंततः कानपुर नगर की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने कार रिलीज करने का आदेश दिया।

यह मामला शहर में काफी चर्चा में रहा, क्योंकि इसमें बड़ी रकम, महंगी सुपरकार और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े कई अहम पहलू शामिल थे।

एक्सीडेंट के बाद जब्त हुई थी कार

जानकारी के अनुसार, यह लग्जरी कार रावतपुर थाना क्षेत्र में एक सड़क हादसे के बाद पुलिस द्वारा जब्त कर ली गई थी। दुर्घटना के बाद पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर उसका तकनीकी और मैकेनिकल निरीक्षण कराया।

जांच पूरी होने के बाद संबंधित रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई। सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही वाहन को रिलीज करने पर विचार किया गया।

दो अदालतों ने सुनवाई से किया किनारा

इस मामले की सुनवाई के दौरान दो अलग-अलग अदालतों ने खुद को केस से अलग कर लिया। इसके बाद मामला कानपुर नगर की CJM कोर्ट में ट्रांसफर किया गया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद CJM कोर्ट ने कार को शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वाहन को लंबे समय तक जब्त रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि लंबे समय तक खड़ी रहने से वाहन की कीमत घट सकती है और नुकसान हो सकता है।

8.83 करोड़ रुपये का सिक्योरिटी बॉन्ड

कार की रिहाई के लिए मालिक को 8.83 करोड़ रुपये का सिक्योरिटी बॉन्ड भरना पड़ा। यह बॉन्ड इस बात की गारंटी है कि वाहन को जांच या अदालत की आवश्यकता होने पर प्रस्तुत किया जाएगा।

इतनी बड़ी राशि का बॉन्ड इस केस को और भी हाई-प्रोफाइल बना देता है। कानपुर में यह मामला लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।

कोर्ट की सख्त शर्तें

CJM कोर्ट ने कार को रिलीज करते समय कई सख्त शर्तें भी लगाईं। आदेश में कहा गया है कि:

  • वाहन को बेचा नहीं जा सकता।

  • कार का ट्रांसफर किसी अन्य व्यक्ति के नाम नहीं किया जाएगा।

  • गाड़ी में किसी प्रकार का मॉडिफिकेशन नहीं किया जाएगा।

  • इंजन या चेसिस नंबर के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

  • जांच या कोर्ट के निर्देश पर वाहन को पेश करना अनिवार्य होगा।

इन शर्तों का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

कानपुर में चर्चा का विषय बना मामला

12 करोड़ की सुपरकार, 8.83 करोड़ का बॉन्ड, दो अदालतों का अलग होना और अंत में CJM कोर्ट का आदेश—इन सभी कारणों से यह मामला कानपुर में काफी चर्चित रहा। शहर में यह चर्चा का विषय बना रहा कि इतनी महंगी कार की जब्ती और रिहाई की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी वाहन से जुड़ी जांच पूरी हो जाती है और अदालत को लगता है कि उसे जब्त रखने का कोई ठोस कारण नहीं है, तो शर्तों के साथ वाहन मालिक को सौंपा जा सकता है।

निष्कर्ष

कानपुर लैम्बोर्गिनी जब्ती मामला कानून, संपत्ति अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया का एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है। अदालत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए एक ओर जांच प्रक्रिया को सुरक्षित रखा, वहीं दूसरी ओर वाहन को अनावश्यक रूप से जब्त रखने से होने वाले नुकसान को भी ध्यान में रखा। फिलहाल, यह मामला कानपुर के चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है।

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