केंद्र सरकार ने दी मंजूरी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने उन्हें तीन साल के कार्यकाल के लिए इस जिम्मेदारी की मंजूरी दी है। पटेल इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका निभा चुके हैं और अब वैश्विक वित्तीय संस्थान में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
नोटबंदी के समय रहे गवर्नर
उर्जित पटेल ने सितंबर 2016 में रघुराम राजन के बाद RBI के 24वें गवर्नर के रूप में पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान ही नवंबर 2016 में केंद्र सरकार ने नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इस निर्णय ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता के जीवन पर बड़ा असर डाला।
2018 में दिया इस्तीफा
हालांकि, दिसंबर 2018 में पटेल ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था। वे पहले ऐसे आरबीआई गवर्नर बने, जिन्होंने व्यक्तिगत कारणों से अपना कार्यकाल अधूरा छोड़ा। इस तरह 1992 के बाद वे सबसे कम अवधि तक गवर्नर पद पर रहने वाले अधिकारी रहे।
महंगाई दर पर तय किया था लक्ष्य
पटेल ने अपने कार्यकाल में महंगाई नियंत्रण को लेकर भी बड़ा कदम उठाया। उन्होंने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके आधार पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई दर का लक्ष्य 4% तय किया गया। इसके बाद से 4% CPI को आरबीआई ने आधिकारिक लक्ष्य के रूप में अपनाया। इस पहल को भारतीय मौद्रिक नीति में अहम सुधार माना गया।
आरबीआई में निभाई कई अहम भूमिकाएं
गवर्नर बनने से पहले उर्जित पटेल RBI में डिप्टी गवर्नर रह चुके थे। इस दौरान उन्होंने मौद्रिक नीति, आर्थिक नीति अनुसंधान, सांख्यिकी व सूचना प्रबंधन, जमा बीमा, संचार और सूचना का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी।
पहले भी IMF से जुड़ाव
पटेल का IMF से पुराना संबंध रहा है। वे पांच साल तक वाशिंगटन डीसी और भारत दोनों में आईएमएफ से जुड़े रहे। 1992 में वे नई दिल्ली में IMF के उप-स्थानिक प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत थे। इस अनुभव ने उन्हें वैश्विक वित्तीय प्रणाली की गहरी समझ दी।
अन्य पदों पर भी संभाली जिम्मेदारी
उर्जित पटेल 1998 से 2001 तक भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में सलाहकार भी रहे। इसके अलावा उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईडीएफसी लिमिटेड, एमसीएक्स लिमिटेड और गुजरात राज्य पेट्रोलियम निगम जैसी प्रतिष्ठित सार्वजनिक और निजी कंपनियों में शीर्ष पदों पर काम किया है।
शिक्षा और शैक्षणिक उपलब्धियां
पटेल की शिक्षा बेहद शानदार रही है। उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से बी.एससी., ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एम.फिल. और येल विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की। अर्थशास्त्र और वित्तीय नीति में उनकी गहरी पकड़ के कारण उन्हें भारत और विदेश दोनों में एक प्रभावशाली अर्थशास्त्री माना जाता है।
निष्कर्ष
आरबीआई के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल की IMF में नियुक्ति भारत के लिए गर्व का विषय है। नोटबंदी, महंगाई नियंत्रण और मौद्रिक नीति सुधारों में उनकी भूमिका ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर छोड़ा। अब IMF में उनकी जिम्मेदारी से भारत की वैश्विक आर्थिक पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है।

