शंकराचार्य से आशीर्वाद लेकर आंदोलन की शुरुआत
बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। वाराणसी में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 6 फरवरी तक केंद्र सरकार इस कानून को समाप्त नहीं करती, तो 7 फरवरी से दिल्ली कूच किया जाएगा।
अलंकार अग्निहोत्री ने इस आंदोलन को केवल विरोध नहीं, बल्कि देश की व्यवस्था में बुनियादी बदलाव की शुरुआत बताया।
नौकरशाही छोड़ आंदोलन की राह
अलंकार अग्निहोत्री हाल के दिनों में तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर वैचारिक संघर्ष का रास्ता चुना। मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और वेदपाठी बटुकों से जुड़ी कथित घटना और यूजीसी के नए नियमों से आहत होकर उन्होंने यह फैसला लिया था।
उनका कहना है कि यह निर्णय किसी भावनात्मक आवेग में नहीं, बल्कि लंबे वैचारिक मंथन के बाद लिया गया है।
SC-ST एक्ट को बताया विभाजनकारी कानून
अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि वह पिछले 35 वर्षों से एससी-एसटी एक्ट के सामाजिक प्रभावों को देख रहे हैं। उनके अनुसार, यह कानून समाज को जोड़ने की बजाय विभाजित कर रहा है और इसका लगातार दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी नीति के तहत लागू किया गया कानून बताया, जो अब सामाजिक तनाव का कारण बन चुका है।
मौन व्रत में भी मिला समर्थन
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात को लेकर अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि शंकराचार्य इस समय मौन व्रत पर हैं, इसलिए बातचीत सीमित रही। हालांकि उन्होंने लिखकर उनका हालचाल पूछा और आशीर्वाद दिया।
अलंकार अग्निहोत्री के मुताबिक, गुरुजनों का आशीर्वाद किसी भी बड़े सामाजिक कार्य को नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।
6 फरवरी की डेडलाइन, 7 फरवरी से दिल्ली कूच
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि 6 फरवरी तक संसद का विशेष सत्र बुलाकर एससी-एसटी एक्ट को समाप्त नहीं किया गया, तो 7 फरवरी से देशभर के लोग दिल्ली की ओर कूच करेंगे। उनका दावा है कि यह आंदोलन अब किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में इसके लिए समर्थन बन चुका है।
सरकार और UGC नीतियों पर तीखा हमला
अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार और यूजीसी के नए रेगुलेशन पर भी तीखा प्रहार किया। उनका कहना है कि यूजीसी का नया नियम सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला है और यदि इसे पूरी तरह लागू किया जाता, तो देश में गंभीर हालात बन सकते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीनी सच्चाई को नजरअंदाज कर फैसले ले रही है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों में टकराव बढ़ रहा है।
राजनीतिक मंशा से किया इनकार
राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। उनका उद्देश्य केवल समाज और देश का कल्याण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे दोबारा नौकरी में लौटने का कोई इरादा नहीं रखते।
निष्कर्ष
शंकराचार्य के आशीर्वाद के साथ अलंकार अग्निहोत्री का यह आंदोलन अब एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक घटनाक्रम का रूप ले सकता है। 6 फरवरी की डेडलाइन और 7 फरवरी से प्रस्तावित आंदोलन पर अब पूरे देश की नजर टिकी हुई है।

