परिचय
चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुछ देशों द्वारा आतंकवाद को खुलेआम समर्थन देना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। पीएम मोदी ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आतंकवाद को न सिर्फ भारत बल्कि पूरी इंसानियत के लिए खतरा बताया।
आतंकवाद पर पीएम मोदी का कड़ा रुख
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद किसी भी राष्ट्र की शांति और विकास के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि आतंकवाद ने हजारों माताओं से उनके बेटे छीन लिए और अनेक बच्चों को अनाथ कर दिया।
पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह केवल भारत की अंतरात्मा पर आघात नहीं था, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए खुली चुनौती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुलेआम समर्थन स्वीकार्य हो सकता है?
भारत की SCO नीति: सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में भारत की SCO नीति के तीन स्तंभ बताए –
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सुरक्षा (Security): आतंकवाद, मादक पदार्थ तस्करी, कट्टरपंथ और संगठित अपराध के खिलाफ मिलकर लड़ाई।
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कनेक्टिविटी (Connectivity): व्यापार और विकास को बढ़ावा देने वाली परियोजनाएं।
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अवसर (Opportunity): युवाओं, स्टार्टअप्स और सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक मंच पर ले जाने का प्रयास।
आतंकवाद से लड़ाई में भारत की पहल
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत ने इस साल SCO-RATS के तहत अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों के खिलाफ संयुक्त सूचना अभियान का नेतृत्व किया। साथ ही, भारत ने टेरर फाइनेंसिंग और कट्टरपंथ (Radicalisation) के खिलाफ समन्वित प्रयासों का प्रस्ताव रखा, जिसे अन्य सदस्य देशों का समर्थन मिला।
कनेक्टिविटी से जुड़े संदेश
पीएम मोदी ने कहा कि मजबूत कनेक्टिविटी न केवल व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देती है, बल्कि विश्वास और विकास के नए रास्ते भी खोलती है। भारत ने चाबहार पोर्ट और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के जरिए मध्य एशिया से संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कनेक्टिविटी परियोजनाओं में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना जरूरी है।
अवसर और सांस्कृतिक संवाद
अवसर के तीसरे स्तंभ पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2023 में भारत की अध्यक्षता के दौरान स्टार्टअप्स, पारंपरिक चिकित्सा, डिजिटल समावेशन, युवा सशक्तिकरण और बौद्ध धरोहर जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने सुझाव दिया कि SCO के तहत एक सभ्यतागत संवाद मंच बनाया जाए, जिससे प्राचीन सभ्यताओं, कला और साहित्य को साझा किया जा सके।
भारत का विज़न: रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र पर काम कर रहा है। कोविड महामारी और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने अवसर तलाशे और उन्हें विकास में बदला। उन्होंने SCO देशों से भारत की विकास यात्रा में साझेदारी का आमंत्रण दिया।
अन्य मुद्दों पर जोर
प्रधानमंत्री ने संगठित अपराध, मादक पदार्थ तस्करी और साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए SCO में चार नए केंद्रों के गठन का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को पुराने ढांचों में कैद रखना आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय है।
अंत में, पीएम मोदी ने SCO की अध्यक्षता संभालने वाले किर्गिजस्तान के राष्ट्रपति जपारोव को बधाई दी और सहयोग को आगे बढ़ाने का भरोसा जताया।
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निष्कर्ष
SCO शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का यह संदेश साफ है कि आतंकवाद पर किसी भी तरह का दोहरा रवैया स्वीकार्य नहीं है। भारत ने अपने अनुभव और पहल से दिखाया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है। मोदी का यह संबोधन न सिर्फ भारत बल्कि पूरी इंसानियत के लिए एकजुटता और सहयोग का आह्वान है।

