परिचय
अफगानिस्तान के नंगरहर प्रांत में 1 सितंबर 2025 को आए 6.0 तीव्रता वाले भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। जालालाबाद और आसपास के इलाकों में मिट्टी के घर ढह गए, जिससे सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। तालिबान सरकार ने राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन दुर्गम इलाकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भूकंप का केंद्र और तीव्रता
जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र जालालाबाद से 27 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में था। गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे इसका असर सतह पर ज्यादा महसूस हुआ।
भूकंप रविवार रात 11:47 बजे (स्थानीय समय) आया, जब लोग सो रहे थे। इसके बाद 20 मिनट के भीतर 4.5 और 5.2 तीव्रता के दो और झटके महसूस किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार, उथले भूकंप अधिक तबाही लाते हैं क्योंकि कंपन सीधे जमीन पर असर डालते हैं।
मौतें और तबाही
नंगरहर स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता अजमल दर्वाइश ने पुष्टि की कि सैकड़ों लोग मारे गए हैं और बड़ी संख्या में घायल हुए हैं। मौतें ज्यादातर मिट्टी के बने मकानों के ढहने से हुईं।
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जालालाबाद और आसपास के गांवों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।
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कई परिवार मलबे के नीचे दब गए।
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घायलों को स्थानीय अस्पतालों और अस्थायी शिविरों में भर्ती कराया गया।
पाकिस्तान सीमा के पास भी झटके महसूस किए गए, लेकिन वहां किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
बचाव कार्य में मुश्किलें
तालिबान सरकार ने तुरंत राहत टीमों को तैनात किया है। हालांकि, नंगरहर और कुनार जैसे पहाड़ी इलाकों की दुर्गम भौगोलिक स्थिति बचाव कार्य को धीमा कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने मदद की पेशकश की है। तालिबान प्रवक्ताओं के अनुसार, राहत सामग्री और मेडिकल सहायता की तत्काल जरूरत है।
भूकंपीय इतिहास और खतरा
अफगानिस्तान का हिंदू कुश क्षेत्र भूकंपों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यहां इंडियन प्लेट, अरबियन प्लेट और यूरोएशियन प्लेट की टक्कर लगातार भूगर्भीय गतिविधियां पैदा करती है।
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सालाना 100 से ज्यादा भूकंप दर्ज होते हैं।
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2015 में आया 7.5 तीव्रता का भूकंप सबसे घातक था।
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2023 में आए 6.3 तीव्रता के भूकंप में 1,500 से 4,000 मौतें हुई थीं।
जलवायु परिवर्तन और भूस्खलन की बढ़ती घटनाएं भी प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य को और जटिल बना देती हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
भूविज्ञानियों का कहना है कि अफगानिस्तान में बार-बार भूकंप आने का सिलसिला जारी रहेगा। 6.0 से ऊपर के भूकंप अपेक्षाकृत दुर्लभ होते हैं, लेकिन उथली गहराई के कारण हर बार बड़े पैमाने पर जनहानि होती है।
निष्कर्ष
अफगानिस्तान में आया यह भूकंप एक बार फिर दिखाता है कि इस देश की भूगोल और राजनीति दोनों की चुनौतियां राहत कार्य को कठिन बना देती हैं। तालिबान सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिलकर ही पीड़ितों को त्वरित सहायता पहुंचा सकते हैं। जालालाबाद और नंगरहर के लोग अब भी मलबे में दबे अपने परिजनों की तलाश कर रहे हैं।
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