अररिया में वोटर लिस्ट रिविजन से ग्रामीणों में खौफ — सरकारी स्कीम और मतदान अधिकार पर खतरा

अररिया में वोटर लिस्ट रिविजन से ग्रामीणों में खौफ

समस्या की गहराई: अररिया के बैजनाथपुर गांव की स्थिति

बिहार के सीमांचल क्षेत्र, विशेषकर अररिया जिले के बैजनाथपुर गांव में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर नागरिकों में भारी नाराजगी है। कई जीवित लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गए हैं, जबकि कुछ मृतकों के नाम अभी भी सूची में बने हुए हैं।


जीवित गायब, मृतकों के नाम मौजूद

  • पेंटर राजमिस्त्री गंगा पासवान लगातार BLO से संपर्क में हैं, लेकिन या फोन पर होल्ड में रखे जाते हैं या वापस स्कूल जाकर कागजात जमा करने की सलाह दी जाती है।

  • मंजू देवी अपनी वोटर कार्ड लेकर आईं, लेकिन वह इस बात से अनजान हैं कि उनका नाम सूची में शामिल है या नहीं।

  • समाजसेवी रंजीत बताते हैं कि “फ़ॉर्म घर-घर नहीं पहुंचे, मृतकों के नाम शामिल हैं और कई जीवित ग्रामीणों के नाम गायब हैं।” गुलामी “14 मृतकों के नाम वोटर लिस्ट में हैं, जबकि कई जीवित लोगों के नाम गायब हैं।”


अधिकार रक्षा की मांग और भय

  • मंजू देवी कहती हैं, “अगर नाम नहीं जुड़ा तो सरकारी लाभ नहीं मिलेगा। हम गरीब आदमी हैं, वोटर लिस्ट में नाम जरूरी है।”

  • नरेंद्र यादव का कहना है कि उनकी बेटी का नाम भी वोटर सूची से हटा दिया गया है।

  • रेखा देवी, जो विधवा हैं, ने कहा कि अगर नाम नहीं जुड़ा तो बच्चों का पालन-पोषण मुश्किल हो जाएगा।


दस्तावेजों और BLO के साथ संघर्ष

  • फ़ॉर्म 6, 7, 8 भरने की प्रक्रिया चल रही है। चुनाव आयोग ने बताया है कि 27 अगस्त तक आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है, लेकिन ग्रामीण चार दिनों से दौड़ रहे हैं।

  • BLO राजीव कहते हैं कि फ़ॉर्म भरने और ब्लॉक कैंप जाने की सलाह दी गई है, लेकिन गंगा का कहना है कि यह जानकारी पहले नहीं दी गई थी।


SIR प्रक्रिया का व्यापक परिदृश्य

  • ECI ने बिहार में SIR शुरू की है, जिससे मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित हो सके, मृत, डुप्लिकेट और गैरवाजिब प्रविष्टियों को हटाया जा सके।

  • CEC ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र की सुरक्षा हेतु भारत के चुनावी अधिकारों का संरक्षण है।

  • विपक्ष ने यह प्रक्रिया “मत चोरी” के रूप में देखना शुरू कर दिया है। CPI(ML) ने इसे संविधान पर हमला बताया है।


निष्कर्ष और संकट का वैश्विक प्रभाव

अररिया के ग्रामीणों की लड़ाई सिर्फ स्थानीय नहीं है—यह एक लोकतांत्रिक चेतावनी है। नामों की अदला-बदली से न सिर्फ वोटिंग अधिकार खतरे में हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं से जुड़ने की संभावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। यह प्रक्रिया विस्तृत विधिक और प्रशासनिक स्तर पर सुधार की मांग करती है।

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