ऑनलाइन गेमिंग की लत ने रचवाई फर्जी किडनैपिंग
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में बी.कॉम द्वितीय वर्ष का छात्र कृष्ण कुमार ऑनलाइन गेमिंग की लत में लाखों रुपये हार गया। पैसे वापस पाने के लिए उसने अपने दोस्त नवीन के साथ मिलकर खुद के अपहरण की झूठी कहानी बना डाली। मकसद था अपने ही पिता से 8 लाख रुपये की फिरौती लेना।
ऐसे शुरू हुई ‘फर्जी अपहरण’ की साजिश
कृष्ण कुमार, पुत्र सत्यवीर सिंह, लंबे समय से ऑनलाइन गेमिंग में पैसे खर्च कर रहा था। लगातार हार के चलते वह भारी कर्ज में डूब गया। दबाव बढ़ने पर उसने एक खतरनाक योजना बनाई—
खुद को किडनैप दिखाकर पिता से पैसे ऐंठने की।
कृष्ण और नवीन ने मिलकर पिता को संदेश भेजा कि कृष्ण को अगवा कर लिया गया है। धमकी दी गई कि यदि 8 लाख रुपये नहीं दिए गए तो उसकी जान को खतरा है।
संदेश पढ़ते ही पिता का दिल दहल गया। सिंचाई विभाग से रिटायर्ड सत्यवीर सिंह ने तुरंत पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।
पुलिस की तकनीकी जांच से खुला राज
शिकायत मिलते ही सीओ द्वितीय कमलेश कुमार के निर्देशन में पुलिस टीम हरकत में आ गई। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर जांच शुरू की।
कुछ ही घंटों में पता चल गया कि कृष्ण कुमार बिल्कुल सुरक्षित है और अपने दोस्त नवीन के साथ मौजूद है। दोनों लड़कों ने पिता को डराकर पैसे लेने के लिए पूरी कहानी गढ़ी थी।
पुलिस ने लोकेशन ट्रैक कर दोनों को हिरासत में ले लिया।
पूछताछ में निकला सारा सच
थाने में पूछताछ के दौरान दोनों छात्रों ने अपराध कबूल किया। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग में हजारों-लाखों रुपये गंवाने के बाद उनके पास पैसा लौटाने का कोई तरीका नहीं बचा था।
डर और आर्थिक दबाव में आकर उन्होंने यह गलत कदम उठा लिया। उनका मकसद सिर्फ पिता से पैसे निकलवाना था।
पिता ने बेटे को दिलाया बचाव, पुलिस ने छोड़ा
कृष्ण के पिता सत्यवीर सिंह ने बेटे की गलती स्वीकारते हुए पुलिस से अनुरोध किया कि उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज न किया जाए। पिता के आग्रह और छात्रों की उम्र को देखते हुए पुलिस ने दोनों को परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐसी हरकत न केवल गैरकानूनी है, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी बेहद खतरनाक है।
ऑनलाइन गेमिंग: नई पीढ़ी के लिए खतरे की घंटी
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे ऑनलाइन गेमिंग की लत युवा जीवन और परिवार की शांति दोनों को बर्बाद कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते परिवारों को बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि ऐसे गंभीर हालात से बचा जा सके।
निष्कर्ष
अलीगढ़ की यह घटना बड़ी सीख छोड़ जाती है—
खेल-खेल में शुरू हुई ऑनलाइन गेमिंग की लत कभी-कभी अपराध की राह तक ले जाती है।
कृष्ण और नवीन बाल-बाल बचे, लेकिन ऐसे मामलों में कई युवाओं का भविष्य अंधेरे में चला जाता है।
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