इज़रायल और सीरिया के बीच हुआ सीजफायर
इज़रायल और सीरिया के बीच युद्धविराम (सीजफायर) का ऐलान हुआ है, जिससे क्षेत्रीय तनाव में थोड़ी राहत की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि तुर्की, जॉर्डन और अन्य पड़ोसी देशों के सहयोग से दोनों देशों ने सीजफायर पर सहमति जताई है।
दमिश्क में हवाई हमले और उसके बाद का संकट
इससे पहले, इज़रायल ने दमिश्क के मध्य इलाके में सीरियाई रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय और राष्ट्रपति भवन के पास कई भारी हवाई हमले किए थे। इन हमलों का उद्देश्य सीरियाई बलों को दक्षिणी सीरिया से हटाने का था, जहां ड्रूज़ अल्पसंख्यकों के साथ झड़पें चल रही थीं। इज़रायल का कहना था कि उनका मकसद सीरियाई ड्रूज़ समुदाय की रक्षा करना है, जो एक छोटा लेकिन प्रभावशाली अल्पसंख्यक समुदाय है। यह समुदाय न केवल सीरिया, बल्कि लेबनान और इज़रायल में भी रहता है।
अमेरिकी राजदूत का बयान
अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने सीरियाई लोगों से अपील की थी कि वे हथियार डालकर अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर शांति और समृद्धि के रास्ते पर चलें। उन्होंने कहा, “हम ड्रूज़, बेडौइन और सुन्नियों से गुजारिश करते हैं कि वे अपने हथियार डाल दें और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर एक नई और एकजुट सीरियाई पहचान का निर्माण करें।”
सीजफायर के बाद भी संघर्ष जारी
सीजफायर की घोषणा के बावजूद, इज़रायल द्वारा हवाई हमले जारी रहने की खबरें आई हैं। इस बीच, सीरियाई अधिकारियों और ड्रूज़ समुदाय के नेताओं ने बुधवार को एक नए युद्धविराम की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य पिछले कई दिनों से चल रहे संघर्षों को रोकना था। हालांकि, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दूसरे सीजफायर के बाद भी इज़रायल की तरफ से हवाई हमले जारी रहे।
अमेरिका का हस्तक्षेप
अमेरिका ने इस स्थिति में हस्तक्षेप करते हुए इसे ‘गलतफहमी’ बताया और सभी पक्षों से युद्ध रोकने पर सहमत होने की घोषणा की। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए आवश्यक है और सभी पक्षों को तनाव को कम करने के लिए हरसंभव कदम उठाने की जरूरत है।
आगे की स्थिति और क्षेत्रीय प्रभाव
यह युद्धविराम क्षेत्रीय राजनीति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इज़रायल और सीरिया के बीच तनाव हमेशा से एक गंभीर मुद्दा रहा है। सीरिया में चल रहे आंतरिक संघर्षों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए स्थिति को संभालना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
निष्कर्ष
हालांकि सीजफायर का ऐलान हुआ है, लेकिन स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। यह देखना होगा कि दोनों पक्ष इस युद्धविराम को कितने समय तक बनाए रखते हैं और क्या इससे मध्य पूर्व में शांति की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस पर बनी रहेंगी कि क्या यह युद्धविराम स्थायी शांति की ओर एक कदम होगा या फिर एक और अस्थिरता का कारण बनेगा।

