इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े पॉक्सो (POCSO) मामले में बड़ी सुनवाई होनी है। कोर्ट नंबर-72, सीरियल नंबर-142 पर होने वाली इस सुनवाई में अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुनाया जाएगा। इस फैसले से साफ होगा कि क्या स्वामी को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिलेगी या गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
पॉक्सो मामले का विवरण और आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जो शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित हैं, पर नाबालिग छात्रों के यौन शोषण का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर के बाद सुर्खियों में आया। एफआईआर में स्वामी के साथ उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और कुछ अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने मीडिया के सामने आकर बताया कि यह कोई एक-दो घटनाओं का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित व्यवस्था के तहत लंबे समय से ऐसी घटनाएं होती रही हैं। उन्होंने लगभग 20 पीड़ितों के होने की बात कही, जो न्याय के लिए सामने आना चाहते हैं। आरोप हैं कि यह घटनाएं केवल एक जगह नहीं, बल्कि कई धार्मिक स्थलों और आयोजनों पर भी हुईं।
आरोपों के खिलाफ स्वामी और समर्थकों की प्रतिक्रिया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को पूरी तरह गलत और साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि जिन बच्चों की बात हो रही है, वे उनके छात्र नहीं हैं और इस पूरे मामले को धार्मिक व राजनीतिक कारणों से बदनाम करने के लिए गढ़ा गया है। वे जांच में पूरा सहयोग करने की बात कह चुके हैं।
स्वामी के शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने आरोपों को निंदनीय बताते हुए कहा कि ये झूठे और दुर्भावनापूर्ण हैं, जो किसी की इज्जत और जीवन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द इस मामले की सच्चाई सामने आए।
मठ की जांच और बटुकों के आरोप
वाराणसी के केदार घाट स्थित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मठ का भी हाल ही में निरीक्षण किया गया। मठ तीन मंजिला है, जहां गुरुकुल, छात्रावास, रसोई और सत्संग स्थल मौजूद हैं। मठ में एक स्विमिंग पूल के नाम पर पूर्व शंकराचार्य के लिए बनाई गई पानी की हौदी है, जिसका अब उपयोग नहीं होता।
इसके विपरीत, खुद को पीड़ित बताने वाले बटुकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उन्हें दीक्षा के नाम पर स्वामी के सामने ले जाया जाता था और वहां अनुचित व्यवहार किया जाता था। आरोप है कि राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों से भी बटुकों को लाया गया था और वे प्रताड़ित हुए। बटुकों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया और कई बच्चे अभी भी मठ में फंसे हो सकते हैं।
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी का दबाव
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने मीडिया से कहा कि उनके पास पेन ड्राइव में वीडियो, चैट, मेडिकल रिपोर्ट और 20 से अधिक पीड़ित बच्चों के बयान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेले में हुआ धरना राजनीतिक समर्थन से प्रेरित था, हालांकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया इस बात की पुष्टि करेगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार और अगली सुनवाई
एफआईआर के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पॉक्सो कोर्ट में केस दायर किया है, जिसमें उन्होंने एफआईआर को झूठा और भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि पीड़ितों की पहचान उजागर करना नियमों के खिलाफ है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को निर्धारित है।
धर्म युद्ध बोर्ड का ऐलान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शिखा विवाद के बाद धर्म युद्ध का ऐलान करते हुए ‘धर्म युद्ध बोर्ड’ जारी किया था। इस बोर्ड में गाय और शंकराचार्य के समर्थन का संदेश था, जबकि दूसरी तरफ सत्ता और मुख्यमंत्री का समर्थन दिखाया गया था। इस बोर्ड ने समाज में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कीं।
निष्कर्ष: आज की सुनवाई क्यों है महत्वपूर्ण?
इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज होने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी। अगर अग्रिम जमानत मंजूर होती है, तो फिलहाल स्वामी को गिरफ्तारी से राहत मिलेगी, अन्यथा कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस मामले का नतीजा न केवल स्वामी और उनके समर्थकों के लिए, बल्कि धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रभाव डाल सकता है।

