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एस जयशंकर ने वॉशिंगटन में ट्रंप के दावों का किया खंडन, कहा- भारत-पाकिस्तान सीजफायर में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं

एस जयशंकर ने वॉशिंगटन में ट्रंप के दावों का किया खंडन

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने मांगी थी युद्धविराम की पहल, भारत ने साफ किया अमेरिकी हस्तक्षेप का दावा निराधार


वॉशिंगटन से रिपोर्ट | जुलाई 2025

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया युद्धविराम (सीजफायर) में अमेरिका या किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। वॉशिंगटन में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए जयशंकर ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया।

डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर एस जयशंकर का करारा जवाब

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की आशंका को टालते हुए सीजफायर करवाया था। लेकिन एस जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा, “जो कुछ हुआ था, उसका रिकॉर्ड बिलकुल स्पष्ट है। युद्धविराम भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच बातचीत के बाद हुआ था। इसे यहीं छोड़ते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ने इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन से संपर्क कर अपनी असहमति भी स्पष्ट रूप से दर्ज कराई थी।


ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने बढ़ाया था हाथ

भारत सरकार के अनुसार, 9-10 मई को भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर की गई जवाबी कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से सीजफायर की पेशकश की गई थी।

जयशंकर ने कहा, “पाकिस्तान के डीजीएमओ ने हमारे डीजीएमओ से संपर्क कर युद्धविराम की मांग की थी। इसके बाद ही दोनों देशों में संघर्ष विराम पर सहमति बनी। इसमें अमेरिका या किसी अन्य देश की कोई भूमिका नहीं थी।”


आतंकवाद पर दोहरी सोच की आलोचना

प्रेस वार्ता में आतंकवाद के मुद्दे पर भी जयशंकर ने वैश्विक समुदाय को आईना दिखाया। उन्होंने कहा, “यह एक सच्चाई है कि जब आतंकवाद का शिकार कोई और देश होता है तो कुछ देशों का नजरिया अलग होता है, लेकिन जब वही आतंकवाद उन्हें प्रभावित करता है तो उनका रुख बदल जाता है।”

उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए यह संकेत दिया कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के मुद्दे पर एकरूपता की कमी है और यह दोहरा रवैया आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करता है।


क्या अमेरिका-भारत संबंधों में पाकिस्तान अब भी फैक्टर है?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या अब भी भारत-अमेरिका संबंधों को तय करने में पाकिस्तान कोई भूमिका निभाता है, खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, तो जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपने द्विपक्षीय रिश्तों को स्वतंत्र रूप से तय करता है।

उन्होंने कहा, “भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते आज पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और व्यापक हैं। इन्हें किसी तीसरे देश के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।”


निष्कर्ष: भारत की रणनीतिक स्पष्टता और आत्मनिर्भर विदेश नीति

एस जयशंकर की वॉशिंगटन में दी गई यह प्रतिक्रिया भारत की विदेश नीति में स्पष्टता और आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। भारत ने न सिर्फ ट्रंप के दावों को गलत ठहराया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद और सीमाई सुरक्षा जैसे मुद्दों पर वह किसी बाहरी दबाव में नहीं आएगा।

इस प्रेस वार्ता से यह संदेश भी गया कि भारत अपनी सैन्य और कूटनीतिक ताकत के बल पर फैसले लेता है, और उसके रणनीतिक निर्णय पूरी तरह से संप्रभु हैं।

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