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कंझावला केस के 3 साल: दो बेटियों की मौत, इंसाफ का इंतजार और कर्ज में डूबा परिवार

दो बेटियों की मौत, इंसाफ का इंतजार और कर्ज में डूबा परिवार

नई दिल्ली: 1 जनवरी 2023 की वह रात दिल्ली कभी नहीं भूल सकती, जब कंझावला की सड़कों पर एक युवती कार के नीचे फंसकर करीब 13 किलोमीटर तक घसीटी गई। उस युवती का नाम था अंजलि। तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन उसके परिवार के लिए समय वहीं ठहर गया है। दर्द कम होने के बजाय और गहरा हो गया, क्योंकि अंजलि के बाद उसकी छोटी बहन अशिका ने भी फांसी लगाकर जान दे दी


अंजलि की मौत ने बदली परिवार की दुनिया

अंजलि अपने परिवार की इकलौती कमाऊ सदस्य थी। वह वेडिंग प्लानर के तौर पर काम करती थी और छोटे-छोटे सपनों से भरा जीवन जी रही थी। मां रेखा बताती हैं कि अंजलि ने अपनी मेहनत से घर के लिए फ्रिज खरीदा, कांच की क्रॉकरी जमा की और हमेशा परिवार को बेहतर जिंदगी देने का सपना देखा।

1 जनवरी 2023 की रात, स्कूटी से लौटते वक्त अंजलि को कार सवार युवकों ने टक्कर मारी और वह कार के नीचे फंस गई। आरोपियों ने गाड़ी नहीं रोकी और उसे करीब 13 किलोमीटर तक घसीटते रहे। इस दर्दनाक हादसे में अंजलि की मौत हो गई।


दूसरी बेटी अशिका की भी गई जान

अंजलि की मौत के बाद परिवार टूट सा गया। सरकार से मिले 10 लाख रुपये के मुआवजे से किसी तरह गुजारा चल रहा था। इसी बीच छोटी बेटी अशिका पर घर की जिम्मेदारी का बोझ बढ़ने लगा। वह नौकरी करना चाहती थी, लेकिन मां ने उसकी उम्र और पढ़ाई को देखते हुए मना कर दिया।

जून 2025 की एक दोपहर, जब मां और भाई घर से बाहर थे, अशिका ने उसी कमरे में पंखे से फांसी लगा ली। मां रेखा बताती हैं कि उसी पलंग पर बेटी की लाश रखी गई थी, जहां आज भी परिवार सोता है।


बीमारी, कर्ज और इंतजार

रेखा खुद गंभीर रूप से बीमार हैं और हफ्ते में तीन दिन डायलिसिस कराना पड़ता है। पहले सरकारी सुविधा मिलती थी, अब हर बार इलाज के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं। परिवार कर्ज के सहारे जी रहा है।

रेखा कहती हैं,
“अब बस 36 लाख रुपये के मुआवजे का इंतजार है। उसी उम्मीद में हम उधार ले पा रहे हैं।”


केस की स्थिति क्या है?

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह हिट एंड रन नहीं बल्कि हिट एंड ड्रैग केस था। आरोपियों को पता था कि कार के नीचे कोई फंसा है, फिर भी उन्होंने गाड़ी नहीं रोकी। सभी आरोपी गिरफ्तार किए गए और चार महीने में करीब 800 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई।

मामला फिलहाल रोहिणी कोर्ट में विचाराधीन है। अक्टूबर 2025 में मोटर एक्सिडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने परिवार को 36.69 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया, लेकिन अब तक राशि नहीं मिली है।


इंसाफ की आस में टूटा परिवार

रेखा कहती हैं कि उन्होंने दोषियों के लिए फांसी की मांग की थी, लेकिन आरोपी आज भी जिंदा हैं और अपनी जिंदगी जी रहे हैं। परिवार के लिए इंसाफ अब सिर्फ एक शब्द बनकर रह गया है।

दो बेटियों को खो चुकी यह मां अब सिर्फ इतना चाहती है कि उसके बेटे सुरक्षित रहें। उसके सपने बड़े नहीं हैं—बस अपने बच्चों को जिंदा और ठीक देखना ही उसकी सबसे बड़ी ख्वाहिश है।

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