कमचटका में 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, हवाई में 6 फीट ऊंची लहरें, जापान में 19 लाख लोगों को हटाया गया

हवाई में 6 फीट ऊंची लहरें, जापान में 19 लाख लोगों को हटाया गया मुख्य बातें:

🌍 रूस के तट पर आया भीषण भूकंप

रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कमचटका प्रायद्वीप के पास मंगलवार सुबह रिक्टर स्केल पर 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। यह भूकंप समुद्र के भीतर बहुत कम गहराई पर (लगभग 19 किमी) आया, जिससे सतह पर ज़ोरदार झटके महसूस किए गए।

US Geological Survey (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र Petropavlovsk-Kamchatsky शहर से लगभग 130 किमी दूर समुद्र में था।


🌊 सुनामी का खतरा, कई देशों में अलर्ट

भूकंप के बाद Pacific Tsunami Warning Center और जापानी मौसम विभाग ने सुनामी की चेतावनी जारी की।

  • हवाई में 6 फीट ऊंची समुद्री लहरें देखी गईं।

  • जापान के होक्काइदो, चिबा और अन्य तटीय क्षेत्रों में लहरें दर्ज की गईं।

  • जापान में 19 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया।

  • चिली, पेरू, इक्वाडोर, गुआम, फिलीपींस, इंडोनेशिया, अमेरिका के कैलिफोर्निया और अलास्का सहित दर्जनों देशों में अलर्ट जारी किया गया।


🛑 खतरे के बीच सतर्कता

  • रूस में 30 से अधिक आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) महसूस किए गए।

  • कमचटका के कुछ क्षेत्रों में मामूली चोटें और संपत्ति को हल्का नुकसान हुआ।

  • जापान में कई लोग इमारतों की छतों पर पहुंचे, फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को खाली कराया गया।

  • हवाई और कैलिफोर्निया में समुद्र तटों को बंद कर लोगों को दूर रहने की चेतावनी दी गई।


🧭 इतिहास का सबसे शक्तिशाली भूकंपों में एक

यह भूकंप 1952 में रूस के सेवेरो-कुरील्स्क में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप के बाद क्षेत्र का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है। कमचटका क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है और 1900 के बाद से यहाँ कई बार 8.0 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप आ चुके हैं।


📢 विशेषज्ञों की राय

भूकंप की तीव्रता और समुद्र के अंदर इसकी सतह के नज़दीक होने के कारण सुनामी की आशंका कई देशों में बनी हुई है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह घटनाक्रम भविष्य में भी दोहराया जा सकता है, इसलिए प्रशांत महासागर के किनारे बसे देशों को हर समय सतर्क रहना चाहिए।

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✅ निष्कर्ष

यह प्राकृतिक आपदा एक बार फिर यह याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना असहाय हो सकता है। सभी प्रभावित देशों को चाहिए कि वे सतर्कता और आपदा प्रबंधन के सभी नियमों का पालन करें। समय पर चेतावनी और जनता की जागरूकता ही बड़े नुकसान को टाल सकती है।

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