जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में प्रकृति का कहर, राहत और बचाव कार्य जारी
किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर), 15 अगस्त 2025: किश्तवाड़ जिले के चशोटी गांव में गुरुवार दोपहर लगभग 12:25 बजे आए बादल फटने की घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। इस भयानक प्राकृतिक आपदा में अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है और 69 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन, सेना और राहत एजेंसियां लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं।
रातभर रुका रेस्क्यू, सुबह फिर शुरू हुई खोजबीन
लगातार बारिश और मलबे के कारण गुरुवार रात रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा, लेकिन शुक्रवार सुबह होते ही पुलिस, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग फिर से मोर्चे पर डट गए। अब तक 167 लोगों को घायल अवस्था में सुरक्षित निकाला जा चुका है।
प्रशासन ने तैनात की भारी मशीनरी
बचाव कार्य तेज़ करने के लिए प्रशासन ने अर्थ-मूवर्स, जेसीबी और अन्य भारी उपकरणों की मदद से बोल्डर, बिजली के खंभे और उखड़े पेड़ों को हटाने का काम शुरू किया है।
पूरे गांव में मची तबाही
चशोटी गांव, जो कि मचैल माता मंदिर यात्रा का अंतिम सड़क मार्ग वाला पड़ाव है, अब मलबे का ढेर बन चुका है। हादसे में:
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16 रिहायशी मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए
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तीन मंदिर, सरकारी इमारतें और एक 30 मीटर लंबा पुल बर्बाद हो गया
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दर्जनों वाहन और एक अस्थायी बाजार भी बह गए
मचैल यात्रा स्थगित
हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा के तहत 9500 फीट ऊंचे मंदिर तक पहुंचते हैं। लेकिन इस हादसे के बाद दूसरे दिन से ही यात्रा को रोक दिया गया है।
अस्पतालों में दर्द और आंसुओं का सन्नाटा
जिला अस्पताल में लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं। कई लोग हाथ में फोटो लेकर अस्पताल के गलियारों में घूम रहे हैं। घायल लोग गहरे सदमे में हैं।
पीड़ितों की आंखों में डर और दर्द
घायल उषा देवी ने कहा, “हमें लगा दुनिया खत्म हो गई… चारों तरफ सिर्फ पानी और पत्थर थे।”
एक मां अनु, जो अपने घायल बेटे की सलामती के लिए रो रही थीं, बोलीं: “बस मेरा बेटा बच जाए, उसकी तो ज़िंदगी शुरू भी नहीं हुई थी।”
अनुज कुमार, जो अपने बेटे को ढूंढ रहे हैं, कहते हैं, “मुझे नहीं पता वो कहां है… वो तो बस अभी घर आने वाला था।”
सेना और प्रशासन युद्ध स्तर पर कर रहे काम
सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि राहत अभियान तेजी से चल रहा है। सर्च लाइट, रस्सियां और खुदाई के औजारों से घायलों को मलबे से निकालने की कोशिश की जा रही है।
जिले के डिप्टी कमिश्नर पंकज कुमार शर्मा और एसएसपी नरेश सिंह खुद मौके पर मौजूद हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
अब भी जारी है खतरा
राहत एजेंसियों का कहना है कि मलबे में दबे लोगों की संख्या अधिक हो सकती है, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। यह त्रासदी उत्तरकाशी (उत्तराखंड) में 9 दिन पहले हुई फ्लैश फ्लड की याद दिलाती है, जिसमें एक की मौत और 68 लोग लापता हुए थे।

