निमिषा प्रिया की फांसी की सजा टली, यमन से आई राहत की खबर
क्या था मामला?
निमिषा प्रिया को 2017 में यमन के नागरिक तलाल एब्दो महदी की हत्या का दोषी पाया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने महदी को बेहोशी के इंजेक्शन दिए थे ताकि वह अपना पासपोर्ट प्राप्त कर सकें, लेकिन इंजेक्शन के कारण महदी की मौत हो गई। यह घटना 2017 में हुई थी, जब निमिषा यमन में काम कर रही थीं। निमिषा के पास एक वैध वर्क परमिट था और वह अपने पति और बेटी के साथ यमन में लगभग एक दशक से रह रही थीं।
निमिषा प्रिया की पृष्ठभूमि
निमिषा प्रिया केरल के पलक्कड़ जिले की निवासी हैं। वह अपनी बेटी और पति के साथ यमन में काम करने आई थीं। 2016 में यमन में गृहयुद्ध के कारण देश से बाहर आना-जाना बंद कर दिया गया था। उनके पति और बेटी पहले ही 2014 में भारत लौट चुके थे, लेकिन निमिषा अपनी नौकरी के कारण वहां रुकी रहीं। जुलाई 2017 में उन पर हत्या का आरोप लगा और यमन की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।
फांसी की सजा का फैसला और न्यायिक प्रक्रिया
निमिषा को 7 मार्च 2018 को यमन की अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। यह सजा उस वक्त के बाद दी गई जब निमिषा ने महदी के पास अपना पासपोर्ट वापस पाने के लिए उसे इंजेक्शन दिया था। कोर्ट ने इसे हत्या के रूप में देखा, क्योंकि इंजेक्शन देने से महदी की मौत हो गई थी। इस फैसले के बाद से निमिषा के परिवार में चिंता की लहर दौड़ गई थी, और भारतीय सरकार से मदद की अपील की गई थी।
निमिषा प्रिया की सजा का स्थगन
हालांकि, अब यमन सरकार ने निमिषा की फांसी की सजा को टाल दिया है। यह एक सकारात्मक कदम है, जिससे उनके परिवार और दोस्तों को उम्मीद की किरण मिली है। परिवार के सदस्यों ने इस फैसले पर राहत की सांस ली है। निमिषा के मामले में अब तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी सक्रियता दिखाते हुए यमन सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप किया है।
भारत की भूमिका और मदद
भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुरू से ही इस मामले में दखल दिया है और यमन में भारतीय दूतावास के जरिए प्रयास किए गए हैं। मंत्रालय ने यमन के अधिकारियों से आग्रह किया था कि वे निमिषा की स्थिति पर फिर से विचार करें और उनके लिए न्याय सुनिश्चित करें। भारत सरकार का यह प्रयास लगातार जारी रहा और इस समय उनके समर्थन से ही निमिषा को राहत मिली है।
आखिरी उम्मीदें और भविष्य
हालांकि निमिषा की सजा टलने के बाद भी, पूरी स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। अब यह देखने वाली बात होगी कि यमन के अधिकारी उनके मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। निमिषा के परिवार को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही न्याय मिलेगा और वह घर वापस लौट पाएंगी। इसके अलावा, यह मामला अन्य भारतीयों के लिए भी एक सबक है कि वे विदेशों में काम करते समय अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहें।
निष्कर्ष
निमिषा प्रिया की फांसी की सजा का टलना एक राहत की खबर है, लेकिन उनके परिवार और दोस्तों को अभी भी चिंता है। यह मामला भारतीयों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है, जो विदेशों में काम करने जाते हैं। सरकार और नागरिक संगठन की मदद से ही निमिषा को राहत मिली है, और अब उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही न्याय मिलेगा।
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