Arattai Messaging App Security: भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा Arattai ऐप अब चर्चा में है। Zoho कंपनी द्वारा तैयार किया गया यह ऐप WhatsApp का सीधा प्रतिद्वंदी बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या Arattai पर किए गए चैट्स वाकई सुरक्षित हैं? खासकर तब, जब इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2EE) केवल कॉलिंग और सीक्रेट चैट्स के लिए मौजूद है, न कि सामान्य चैटिंग के लिए।
Arattai कैसे कर रहा है काम?
Zoho का Arattai ऐप कुछ ही दिनों में Apple App Store और Google Play Store पर टॉप पर पहुंच गया। यह कॉलिंग और मैसेजिंग दोनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि यह WhatsApp का भारतीय विकल्प है।
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कॉलिंग: वॉयस और वीडियो कॉल्स में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन मौजूद है।
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सीक्रेट चैट्स: इसमें भी E2EE मिलता है।
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नॉर्मल चैट्स: केवल बेसिक एन्क्रिप्शन है, जिससे आपकी चैट्स Zoho के सर्वर पर डिक्रिप्ट हो सकती हैं।
WhatsApp और Arattai में क्या अंतर?
WhatsApp Signal Protocol का इस्तेमाल करता है, जिसे एन्क्रिप्शन का “गोल्ड स्टैंडर्ड” माना जाता है। इस प्रोटोकॉल की खासियत है कि मैसेज भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई भी इसे पढ़ नहीं सकता—यहां तक कि WhatsApp भी नहीं।
Arattai में सामान्य चैट्स के लिए ऐसा एन्क्रिप्शन नहीं है। यानी कंपनी चाहे तो आपके चैट्स तक पहुंच सकती है। अगर सरकार या कोई एजेंसी डेटा मांगे, तो कंपनी के पास उसे देने का विकल्प मौजूद है।
क्या कंपनी पढ़ सकती है आपके चैट्स?
तकनीकी रूप से देखा जाए तो हां, क्योंकि Arattai पर की गई सामान्य चैट्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं हैं। इसका मतलब यह है कि आपके मैसेज Zoho के सर्वर पर एक ऐसे फॉर्म में पहुंचते हैं, जिन्हें कंपनी जरूरत पड़ने पर एक्सेस कर सकती है।
इसके अलावा, इस कमी का फायदा हैकर्स भी उठा सकते हैं। बिना मजबूत एन्क्रिप्शन के, डेटा लीक और साइबर अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
Arattai की एन्क्रिप्शन पॉलिसी
कंपनी की वेबसाइट के अनुसार:
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कॉलिंग: पूरी तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड।
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सीक्रेट चैट्स: सुरक्षित और प्राइवेट।
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डेटा स्टोरेज: भारत में ही रहता है और एन्क्रिप्टेड फॉर्म में सेव होता है।
हालांकि, वेबसाइट और पब्लिक डॉक्यूमेंट्स में यह स्पष्ट नहीं बताया गया है कि कौन से एन्क्रिप्शन एल्गोरिद्म (जैसे AES-256, RSA या Signal Protocol) इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
हैकिंग का कितना खतरा है?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी चैटिंग ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नहीं है, तो हैकिंग और डेटा चोरी का खतरा ज्यादा रहता है। हैकर्स दूर बैठे भी आपकी चैट्स को ट्रेस कर सकते हैं।
WhatsApp क्यों है ज्यादा सुरक्षित?
WhatsApp का पूरा चैटिंग सिस्टम Signal Protocol पर आधारित है। यह ओपन-सोर्स है और दुनियाभर के क्रिप्टोग्राफर्स द्वारा कई बार ऑडिट किया जा चुका है। रिसर्चर्स ने इसे अब तक के सबसे मजबूत एन्क्रिप्शन सिस्टम में से एक माना है।
नतीजा: क्या Arattai सुरक्षित है?
Arattai भारतीय ऐप है और कॉलिंग व सीक्रेट चैट्स में सुरक्षा प्रदान करता है। लेकिन, सामान्य चैट्स में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की कमी इसे WhatsApp और Signal जैसे ऐप्स से कमजोर बनाती है।
इसका मतलब है कि प्राइवेसी के मामले में Arattai फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। अगर आपको अधिक सुरक्षा चाहिए तो फिलहाल WhatsApp और Signal बेहतर विकल्प माने जाते हैं।

