साधारण जीवन जीने वाले अरबपति
स्वदेशी मैसेजिंग ऐप Arattai ने भारत में धूम मचा दी है. इस ऐप को बनाने वाली कंपनी Zoho Corporation के फाउंडर श्रीधर वेम्बू अपनी अरबों की संपत्ति के बावजूद बेहद साधारण जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं. फोर्ब्स की 2024 टॉप-100 इंडियन बिलेनियर्स लिस्ट में वे 51वें स्थान पर थे और उनकी कुल नेटवर्थ 5.8 अरब डॉलर आंकी गई थी.
IIT से अमेरिका तक का सफर
श्रीधर वेम्बू ने IIT मद्रास से 1989 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इसके बाद उन्होंने 1994 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, अमेरिका से पीएचडी पूरी की. करियर की शुरुआत क्वालकॉम में सिस्टम डिजाइन इंजीनियर के रूप में हुई, लेकिन कॉर्पोरेट जॉब उन्हें ज्यादा दिन रास नहीं आई.
गांव लौटकर शुरू की कंपनी
नौकरी छोड़कर वे भारत लौटे और बड़े शहरों की बजाय तमिलनाडु के तेनकाशी जिले के एक छोटे से गांव में बस गए. यहीं से उन्होंने 1990 के दशक में अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर AdventNet की नींव रखी, जो बाद में Zoho Corp के नाम से जानी गई.
Zoho और Arattai की सफलता
Zoho कॉर्पोरेशन आज भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक है. 2023-24 में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 8,703 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. वहीं 2021 में लॉन्च किया गया Arattai ऐप WhatsApp का स्वदेशी विकल्प माना जा रहा है और तेजी से लोकप्रिय हुआ है.
शिक्षा के लिए Zoho विश्वविद्यालय
2004 में श्रीधर वेम्बू ने Zoho University (अब Zoho Schools of Learning) की स्थापना की. यहां स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री-फोकस्ड स्किल्स सिखाई जाती हैं और सीधे कंपनी में रोजगार के अवसर मिलते हैं.
सादगी भरा जीवन
अरबों की संपत्ति के मालिक होने के बावजूद श्रीधर वेम्बू गांव में रहते हैं, साइकिल से सफर करते हैं और लोकल लाइफस्टाइल अपनाते हैं. उनका मानना है कि सादगी ही असली संपत्ति है.
नेटवर्थ और परिवार
फोर्ब्स के अनुसार 2018 में उनकी संपत्ति 1.6 अरब डॉलर थी, जो 2024 तक बढ़कर 5.8 अरब डॉलर हो गई. उनकी बहन राधा वेम्बू भी Zoho की सह-संस्थापक हैं और 3.2 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ भारत की सबसे अमीर महिलाओं में शुमार हैं.
IPO पर उनका नजरिया
Zoho के IPO को लेकर उठ रही अटकलों पर वेम्बू ने साफ किया है कि कंपनी फिलहाल शेयर बाजार में लिस्ट होने की जल्दी में नहीं है. उनका कहना है कि “Zoho एक औद्योगिक अनुसंधान प्रयोगशाला की तरह है, जहां हम अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक नवाचार पर ध्यान देते हैं.”

