ग्वालियर सिपाही का नाम आया सामने: अर्चना तिवारी की गुमशुदगी केस में नए राज

अर्चना तिवारी की गुमशुदगी केस में नए राज

इंदौर/कटनी/लखीमपुर खीरी। मध्य प्रदेश की युवती अर्चना तिवारी की गुमशुदगी का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। 12 दिन लापता रहने के बाद अर्चना को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से बरामद कर लिया गया। लेकिन इस बीच उसकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) ने जांच को नई दिशा दी है। पुलिस की जांच ग्वालियर में तैनात एक सिपाही तक पहुंची है, जिसने अर्चना से डेढ़ साल से बातचीत की थी और उसके लिए टिकट भी बुक कराए थे।


फोन पर बातचीत से जुड़ा सिपाही

जांच के दौरान अर्चना की कॉल डिटेल में ग्वालियर के एक सिपाही का नंबर सामने आया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह अर्चना से डेढ़ साल से फोन पर बात करता रहा है, लेकिन उसने दावा किया कि वह कभी आमने-सामने नहीं मिले। उसका कहना है कि उसने सिर्फ इंदौर से कटनी तक का बस टिकट बुक कराया था, जबकि ट्रेन यात्रा से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह सिपाही फिलहाल झांसी रोड थाने में रखा गया है और उससे घंटों तक पूछताछ जारी है। उसने बयान दिया कि बातचीत सिर्फ कोर्ट से जुड़े काम के लिए हुई थी।


रक्षाबंधन पर घर लौट रही थी अर्चना

मामला रक्षाबंधन से जुड़ा है। अर्चना तिवारी इंदौर के एक हॉस्टल में रहकर सिविल जज की तैयारी कर रही थी। 7 अगस्त को वह नर्मदा एक्सप्रेस से कटनी जाने के लिए निकली। उसके पास B3 कोच, बर्थ नंबर 3 का रिजर्वेशन था। रात करीब 10 बजे उसने अपनी चाची से फोन पर बात की और बताया कि वह भोपाल के पास है।


ट्रेन से गायब, मिला सिर्फ बैग

8 अगस्त की सुबह कटनी साउथ स्टेशन पर परिजन उसे लेने पहुंचे, लेकिन अर्चना ट्रेन से उतरी ही नहीं। उसका मोबाइल भी बंद मिला। परिजनों ने ट्रेन में तलाश की तो सीट पर उसका बैग मिला। बैग में राखी, गिफ्ट और सामान रखा हुआ था। इस घटना ने परिवार को सदमे में डाल दिया और पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई गई।


सीसीटीवी और लोकेशन से नहीं मिला सुराग

भोपाल, रानी कमलापति और नर्मदापुरम स्टेशन के सीसीटीवी खंगाले गए, लेकिन अर्चना का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला। मोबाइल की आखिरी लोकेशन नर्मदापुरम ब्रिज के पास मिली। इस आधार पर एनडीआरएफ ने नर्मदा नदी में सर्च अभियान चलाया, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।


समाज और राजनीति में हलचल

अर्चना की गुमशुदगी ने समाज और छात्र राजनीति में हलचल मचा दी। कांग्रेस से जुड़े एक युवा नेता ने घोषणा की कि जो भी अर्चना को ढूंढने में मदद करेगा, उसे 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। नेता ने उसे अपनी बहन बताया और कहा कि हर रक्षाबंधन पर वह उन्हें राखी बांधती थी।


आखिरकार लखीमपुर खीरी से बरामदगी

लगातार खोजबीन के बाद पुलिस ने अर्चना को लखीमपुर खीरी (यूपी) से सुरक्षित बरामद कर लिया। फिलहाल वह पुलिस की सुरक्षा में है और उससे पूछताछ जारी है। बरामदगी के बाद परिवार ने राहत की सांस ली, लेकिन सवाल अब भी बरकरार हैं कि वह ट्रेन से कैसे गायब हुई और लखीमपुर खीरी कैसे पहुंची।


अनसुलझे सवाल अब भी बाकी

हालांकि अर्चना मिल गई है, लेकिन कई रहस्य अब भी सुलझने बाकी हैं—

  • ट्रेन से गायब होकर वह कहां गई?

  • ग्वालियर का सिपाही इस मामले से कितना जुड़ा है?

  • बस टिकट और फोन कॉल का सच क्या है?

  • क्या यह महज इत्तफाक था या किसी योजना का हिस्सा?

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच संवेदनशीलता से की जा रही है और हर एंगल पर बारीकी से पड़ताल हो रही है।


निष्कर्ष
अर्चना तिवारी की बरामदगी से परिवार को राहत जरूर मिली है, लेकिन इस केस के कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। ग्वालियर के सिपाही से हुई बातचीत और टिकट बुकिंग ने जांच को नई दिशा दी है। आने वाले दिनों में पुलिस की पड़ताल से इस रहस्यमय गुमशुदगी की असली कहानी सामने आ सकती है।

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