जौनपुर वृद्धाश्रम में महिला की मौत पर बड़ा विवाद: बेटे ने कहा—‘शादी है, मां का शव 4 दिन फ्रीजर में रखो’

बेटे ने कहा—‘शादी है, मां का शव 4 दिन फ्रीजर में रखो’

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसमें गोरखपुर की रहने वाली शोभा देवी की मौत के बाद बेटे के असंवेदनशील व्यवहार ने सभी को हैरान कर दिया। विवाह समारोह के चलते बेटे ने वृद्धाश्रम को निर्देश दिया कि “मां की डेड बॉडी चार दिन डीप फ्रीजर में रख दो, अभी घर लाने से अपशगुन होगा।”

इस घटना ने न सिर्फ वृद्धाश्रम संचालकों को सन्न कर दिया, बल्कि समाज में बुजुर्गों के प्रति उपेक्षा और संवेदनहीनता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


मौत के बाद बेटे का ‘अनोखा फरमान’

जौनपुर के वृद्धाश्रम में रहने वाली 65 वर्षीय शोभा देवी बीमार थीं। 19 नवंबर को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
वृद्धाश्रम संचालकों ने जैसे ही उनके छोटे बेटे को सूचना दी, उसने बड़े भाई से बात करने को कहा। थोड़ी देर बाद जवाब आया—

“घर में शादी है… शव अभी नहीं लाएंगे। चार दिन फ्रीजर में रख दो।”

वृद्धाश्रम के प्रभारी रवि चौबे के मुताबिक, यह सुनकर सभी लोग स्तब्ध रह गए। बेटे ने यही बात उनसे दोहराते हुए कहा कि शादी खत्म होने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।


गोरखपुर ले जाने पर भी नहीं किया अंतिम संस्कार

मामले की जानकारी रिश्तेदारों को होने पर वे अंतिम दर्शन के लिए शव को गोरखपुर ले गए। लेकिन यहां भी बड़े बेटे का रवैया बदलता नहीं दिखा।

शव जलाने के बजाय दफनाया गया

परिवार के बड़े बेटे ने अंतिम संस्कार (दाह संस्कार) के बजाय शव को दफना दिया, यह कहते हुए कि चार दिन बाद मिट्टी खोदकर अंतिम संस्कार कर देंगे।

इस पर दिवंगत महिला के पति भुआल गुप्ता ने दुख व्यक्त करते हुए कहा—

“चार दिन में शव कीड़े खा जाएंगे… यह कैसी इंसानियत है?”


पूरी कहानी: कैसे वृद्धाश्रम पहुंचे थे दंपति

गोरखपुर के भरोईया गांव निवासी भुआल गुप्ता किराना व्यापारी थे। वे पत्नी शोभा देवी और तीन बेटों के साथ रहते थे। परिवार में लगातार विवाद चलते रहे। लगभग एक वर्ष पहले बड़े बेटे ने दोनों बुजुर्गों को घर से निकाल दिया।

सुसाइड के लिए पहुंचे राजघाट

घर से निकाल दिए जाने के बाद भुआल गुप्ता अवसाद में आ गए और गोरखपुर के राजघाट पहुँचकर जान देने का प्रयास किया।
स्थानीय लोगों ने उन्हें समझाते हुए अयोध्या और मथुरा जाने की सलाह दी, जहाँ वृद्धों के लिए आश्रय स्थान उपलब्ध होते हैं।

अयोध्या-मथुरा में सहारा न मिला

दोनों पहले अयोध्या गए, लेकिन कोई व्यवस्था न होने पर मथुरा पहुँचे। यहाँ कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें जौनपुर में चल रहे वृद्धाश्रम की जानकारी दी। आश्रम संचालक रवि चौबे ने उनसे संपर्क कर उन्हें जौनपुर बुला लिया।


बीमारी के कारण हुई मौत

कुछ महीने पहले शोभा देवी के पैर में गंभीर परेशानी आई थी। डॉक्टरों के इलाज के बाद वह ठीक चल रही थीं, लेकिन 19 नवंबर को अचानक तबीयत खराब होने पर उनकी मृत्यु हो गई।

वृद्धाश्रम में सभी लोग उनकी मौत से दुखी थे, लेकिन बेटे की प्रतिक्रिया ने यहां सभी को अंदर तक झकझोर दिया।


वृद्धाश्रम संचालक बोले—”पहली बार ऐसा मामला देखा”

वृद्धाश्रम के प्रभारी रवि चौबे ने बताया—

“हमने आज तक ऐसा मामला नहीं देखा कि मां की मौत पर बेटा कहे कि अंतिम संस्कार से अपशगुन होगा। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने आगे कहा कि परिवार को समझाकर शव गोरखपुर भेजा गया, लेकिन वहां भी सम्मानजनक अंतिम संस्कार नहीं किया गया।


समाज के लिए बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि समाज से भी एक प्रश्न पूछती है—
क्या बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का भाव खोता जा रहा है?

जहां एक तरफ वृद्धाश्रम में लोग बेसहारा बुजुर्गों की सेवा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई परिवार उन्हें बोझ समझकर दूर कर देते हैं।

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