झारखंड एयर एम्बुलेंस क्रैश: 6000 फुट पर पायलट को हुआ खतरे का अंदेशा, 7 लोगों की मौत की पूरी कहानी

7 लोगों की मौत की पूरी कहानी

दसे की शुरुआत: उड़ान के कुछ मिनट बाद बदले हालात

झारखंड के चतरा जिले में एयर एम्बुलेंस क्रैश की दर्दनाक घटना सामने आई है। इस हादसे में कुल 7 लोगों की मौत हो गई। विमान ने भारतीय समयानुसार शाम 7 बजकर 11 मिनट पर रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जैसे ही विमान लगभग 6000 फुट की ऊंचाई पर पहुंचा, पायलट को मौसम या तकनीकी समस्या का अंदेशा हुआ।

बताया जा रहा है कि पायलट ने खराब मौसम को देखते हुए अपना रूट बदलने (डिविएशन) की अनुमति मांगी थी। कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क करने के बाद उसने दिशा बदलने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही देर बाद हालात बिगड़ गए।

7:34 बजे टूटा संपर्क, रडार से भी गायब हुआ विमान

शाम 7:34 बजे के करीब विमान का संपर्क कोलकाता कंट्रोल रूम से टूट गया। उस समय विमान वाराणसी से लगभग 100 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व की दिशा में था। संपर्क टूटने के साथ ही विमान रडार से भी गायब हो गया। इसके बाद खोजबीन शुरू की गई और बाद में चतरा जिले के सिमरिया के पास उसका मलबा मिला।

मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही इस क्षेत्र में खराब मौसम और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की थी। माना जा रहा है कि तूफान और खराब मौसम इस हादसे की बड़ी वजह हो सकते हैं।

जिला प्रशासन का बयान: तूफान बना कारण

चतरा की डीसी कीर्तिश्री जी ने प्राथमिक जांच के आधार पर बताया कि तूफान के कारण यह हादसा हुआ। डॉक्टरों की टीम ने मौके पर पहुंचकर 7 लोगों की मौत की पुष्टि की। मृतकों में दो क्रू मेंबर और पांच यात्री शामिल थे। यात्रियों में एक मरीज और उसके परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं।

प्रशासन ने कहा है कि आगे की जांच के बाद ही हादसे के असली कारणों की पुष्टि हो पाएगी।

एविएशन मिनिस्ट्री और AAIB की जांच शुरू

एविएशन मिनिस्ट्री की टीम दुर्घटनास्थल का दौरा करेगी। टीम ब्लैक बॉक्स की तलाश और अन्य तकनीकी सबूत इकट्ठा करेगी। इसके अलावा एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की टीम भी सक्रिय हो गई है।

AAIB की टीम दिल्ली स्थित रेडबर्ड एविएशन के कार्यालय का दौरा कर सकती है। वहां से विमान और ऑपरेटर कंपनी से जुड़े दस्तावेज लिए जाएंगे। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि हादसा मौसम की वजह से हुआ या कोई तकनीकी खराबी भी जिम्मेदार थी।

जंगल के बीच हुआ क्रैश, राहत कार्य में आई मुश्किलें

घटनास्थल काफी अंदरूनी और जंगल से घिरा हुआ था। एसएसबी के सेकंड इन कमांड रमेश कुमार ने बताया कि सूचना मिलने के बाद उनकी टीम मौके पर पहुंची। वहां तक पहुंचने के लिए लगभग दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा क्योंकि उस इलाके में कोई सीधी सड़क नहीं थी।

उन्होंने बताया कि जब टीम रात में मौके पर पहुंची, तब तक कोई भी जीवित नहीं था। शवों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल था। टीम के पास सिर्फ एक स्ट्रेचर था, जिसे वे अपने साथ लाए थे। घने जंगल और अंधेरे की वजह से राहत और बचाव कार्य काफी चुनौतीपूर्ण रहा।

स्थानीय लोगों में शोक, जांच पर टिकी निगाहें

इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल ने मिलकर शवों को बाहर निकाला और आगे की प्रक्रिया शुरू की। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

झारखंड एयर एम्बुलेंस क्रैश की यह घटना कई सवाल खड़े करती है—क्या मौसम की चेतावनी के बावजूद उड़ान भरना सही था? क्या तकनीकी जांच पूरी तरह से की गई थी? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

फिलहाल, यह हादसा एक बड़ी त्रासदी के रूप में सामने आया है, जिसमें सात जिंदगियां असमय खत्म हो गईं।

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