राजस्थान के झालावाड़ में दर्दनाक स्कूल हादसा
राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलौद गांव में स्थित एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य घायल हो गए। यह हादसा शुक्रवार सुबह हुआ जब बच्चे प्रार्थना सभा के लिए स्कूल में इकट्ठा हुए थे। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की मदद से बच्चों को मलबे से बाहर निकाला गया और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मौत और घायल बच्चे: हादसे की भयावहता
यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब स्कूल के बच्चों ने छत से कंकड़ गिरते देख शिक्षक से चेतावनी दी, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। छात्रा वर्षा ने बताया कि जब बच्चों ने टीचरों से कंकड़ गिरने के बारे में कहा तो उन्होंने डांटते हुए बच्चों को बैठने के लिए कहा। इसके बाद अचानक छत गिर गई और कई बच्चे मलबे के नीचे दब गए। हादसे के वक्त शिक्षकों का एक समूह पास में नाश्ता कर रहा था, और उनकी लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।
इस घटना में मृतकों की संख्या सात है, जबकि घायल बच्चों की संख्या दर्जनभर से अधिक बताई जा रही है। इन बच्चों को पास के स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भेजा गया है। घटना के बाद से गांव में गहरा सदमा और गुस्से का माहौल है, क्योंकि कई बार स्कूल की जर्जर हालत के बारे में शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
स्कूल की जर्जर हालत और प्रशासन की अनदेखी
स्कूल की इमारत 78 साल पुरानी थी और यह समय के साथ अत्यधिक जर्जर हो चुकी थी। बच्चों के अनुसार, छत और दीवारों का प्लास्टर कई बार किया गया था, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। कई बार प्रशासन को स्कूल की हालत के बारे में सूचित किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस घटना ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है, जिसके कारण कई मासूमों की जान चली गई।
टीचर और अधिकारी निलंबित: प्रशासन की कार्रवाई
घटना के बाद से राजस्थान सरकार और जिला प्रशासन में हलचल मच गई है। इस हादसे में लापरवाही बरतने के आरोप में पांच शिक्षक और एक शिक्षा विभाग का अधिकारी निलंबित कर दिया गया है। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई गई है, और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और नौकरी का ऐलान
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने हादसे के बाद मृतक बच्चों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। इसके साथ ही, मृतकों के परिवारों को एक परिजन को संविदा पर नौकरी देने का भी वादा किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मदन दिलावर ने यह भी बताया कि राज्य सरकार इस हादसे के बाद पिपलौद गांव में एक नया स्कूल बनाएगी और मृतक बच्चों के नाम पर स्कूल के कमरों का नाम रखा जाएगा। यह कदम सरकार की ओर से बच्चों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
निष्कर्ष
झालावाड़ के पिपलौद गांव में हुए इस स्कूल हादसे ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है। इस दर्दनाक घटना से यह साफ हो गया कि बच्चों की सुरक्षा और स्कूल भवनों की हालत पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। यह हादसा एक चेतावनी है कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जल्द और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में बच्चों के साथ ऐसी कोई दुर्घटना न हो।

