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दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CAQM की भूमिका पर उठे बड़े सवाल

दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण: हर साल वही हाल

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण अब एक स्थायी संकट बन चुका है. खासकर सर्दियों के मौसम में हालात और बदतर हो जाते हैं. एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अक्सर “गंभीर” श्रेणी में पहुंच जाता है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है.

हर साल स्थिति बिगड़ते ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है. इसके तहत निर्माण कार्य रोके जाते हैं, डीजल वाहनों पर पाबंदी लगती है और स्कूलों को बंद तक करना पड़ता है. इसके बावजूद हवा साफ नहीं हो पा रही है, जिससे प्रशासनिक प्रयासों पर सवाल उठ रहे हैं.

CAQM का गठन और जिम्मेदारी

दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने अगस्त 2021 में Commission for Air Quality Management (CAQM) का गठन किया था. इस आयोग ने पहले से मौजूद EPCA की जगह ली.

CAQM को नियम बनाने, राज्यों को निर्देश देने, उल्लंघन पर कार्रवाई करने और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े फैसले लेने की व्यापक शक्तियां दी गईं. इसमें केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और पर्यावरण से जुड़े जानकार शामिल हैं. उम्मीद थी कि यह आयोग प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण ला सकेगा.

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने CAQM की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने साफ कहा कि आयोग प्रदूषण के असली कारणों की पहचान करने और स्थायी समाधान देने में नाकाम रहा है.

कोर्ट का कहना था कि सिर्फ GRAP जैसे अस्थायी कदम उठाने से समस्या का हल नहीं निकलेगा. प्रदूषण के स्रोत—जैसे औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों का धुआं, कचरा जलाना और निर्माण गतिविधियां—इन पर ठोस और दीर्घकालिक नीति जरूरी है.

करोड़ों खर्च, नतीजे नदारद

आरटीआई से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, CAQM को हर साल करोड़ों रुपये का बजट मिला. फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए गए, निरीक्षण हुए और आदेश जारी किए गए, लेकिन जमीन पर प्रदूषण में कोई बड़ी कमी नजर नहीं आई.

विशेषज्ञों का मानना है कि CAQM की कार्रवाई ज्यादातर “फायर-फाइटिंग” तक सीमित रही. यानी जब हालात बिगड़े, तब कदम उठाए गए, लेकिन पूरे साल की ठोस योजना नहीं बनाई गई.

पर्यावरण विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-NCR को अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है.
उनके अनुसार:

सिर्फ सर्दियों में पाबंदियां लगाकर साफ हवा का सपना पूरा नहीं हो सकता.

साफ हवा हर नागरिक का अधिकार

दिल्ली-NCR के लोग सालों से जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है.

अब जरूरत है कि CAQM अपने असली उद्देश्य पर दोबारा ध्यान दे और प्रदूषण के मूल कारणों पर काम करे. साफ हवा कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है—और इसे हर मौसम में सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

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