धार भोजशाला मस्जिद-मंदिर मामले में ASI की नई रिपोर्ट, परमार राजाओं के मंदिर के अवशेष मिले

परमार राजाओं के मंदिर के अवशेष मिले

वैज्ञानिक सर्वे में प्राचीन संरचना का खुलासा

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित कमल मौला मस्जिद-भोजशाला परिसर को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने नई वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की है। लगभग 2,000 पन्नों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा मस्जिद के स्थान पर पहले परमार राजाओं के शासनकाल का एक विशाल मंदिर मौजूद था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मौजूदा इमारत का निर्माण पुराने मंदिर के हिस्सों का पुनः उपयोग कर किया गया था।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने सोमवार को सभी पक्षों को इस रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और विचार रखने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है।


ASI ने क्या खोजा?

रिपोर्ट के अनुसार परिसर में वास्तुशिल्प अवशेष, मूर्तिकला के टुकड़े, शिलालेख और नागकर्णिका शिलालेख मिले हैं। वैज्ञानिक जांच के आधार पर यह माना गया है कि ये संरचनाएं 10वीं-11वीं शताब्दी के परमार काल से संबंधित हैं।

ASI ने रिपोर्ट में उल्लेख किया कि मौजूदा इमारत बेसाल्ट की प्राचीन संरचना के ऊपर बनाई गई थी, जिसका निचला हिस्सा अभी भी आधार के रूप में मौजूद है। अलंकृत स्तंभ और दीवार के खंभे पहले के मंदिर का हिस्सा थे, जिन्हें मस्जिद के बरामदे (कोलोनेड्स) में दोबारा इस्तेमाल किया गया।

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां, धार्मिक प्रतीक और संस्कृत एवं प्राकृत शिलालेख मौजूद हैं। ये शिलालेख अरबी और फारसी शिलालेखों से पुराने हैं। इसके अलावा, इंडो-सासैनियन काल से लेकर स्वतंत्र भारत तक के 31 चांदी, तांबे और एल्युमिनियम के सिक्के भी मिले, जिनमें सबसे पुराने सिक्के परमार राजाओं के समय के हैं, जब धार उनकी राजधानी थी।


विवाद और आपत्तियां

हिंदू पक्ष, विशेष रूप से हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के आशीष गोयल ने कहा कि यह रिपोर्ट उनके दावे का समर्थन करती है कि भोजशाला परिसर परमार कालीन स्मारक था, जिसे क्षतिग्रस्त कर नई इमारत खड़ी की गई।

वहीं, मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद ने कहा कि वे रिपोर्ट पर आपत्तियां दर्ज करेंगे। उनका आरोप है कि ASI ने उनके पुराने विरोधों को नजरअंदाज किया और सर्वे में पिछली वस्तुओं को शामिल किया गया।


अदालत में अगला कदम

हाई कोर्ट ने अब सभी पक्षों को रिपोर्ट पर जवाब देने का मौका दिया है। अदालत का कहना है कि सभी आपत्तियों और दस्तावेजों का अध्ययन कर मामला आगे बढ़ाया जाएगा।

यह सर्वे विवादित स्थल को लेकर धार्मिक और ऐतिहासिक दावों के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। ASI की रिपोर्ट ने इस मामले में पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर नई बहस शुरू कर दी है।


निष्कर्ष

धार के भोजशाला परिसर को लेकर ASI की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा मस्जिद से पहले यह स्थल परमार काल के एक विशाल मंदिर का हिस्सा था। हालांकि, अदालत सभी पक्षों के विचार और आपत्तियों के आधार पर ही अंतिम निर्णय करेगी।

यह मामला धार्मिक, ऐतिहासिक और न्यायिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है और आने वाले हफ्तों में हाई कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

यह भी पढ़ें:  भोपाल: झुग्गी से आलीशान विला तक, दो बहनों और साथी का ‘डर्टी गेम’ उजागर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *