पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर ‘कार के अंदर रोमांस’ वीडियो वायरल: ATMS मैनेजर आशुतोष सरकार पर गंभीर आरोप, कई पीड़ित सामने आए

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर 'कार के अंदर रोमांस' वीडियो वायरल

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे घोटाला: CCTV फुटेज के दुरुपयोग से मचा हड़कंप

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर एक नवविवाहित दंपती के निजी पलों वाला वीडियो वायरल होने के बाद पूरे सिस्टम में हड़कंप मच गया है। यह वीडियो एक्सप्रेसवे के CCTV कैमरों से रिकॉर्ड किया गया था। जांच में सामने आया कि ATMS (Anti Traffic Management System) के असिस्टेंट मैनेजर आशुतोष सरकार ने अपने पद और अधिकारों का गलत इस्तेमाल करते हुए लोगों की निजी जिंदगी में दखल दिया


कौन है आशुतोष सरकार?

आशुतोष सरकार एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और ट्रैफिक मॉनिटरिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग में तैनात था। वह सुपर वेव कम्युनिकेशन एंड इन्फ्रा सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नामक आउटसोर्सिंग कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम कर रहा था। इस कंपनी को NHAI की ओर से एक्सप्रेसवे की निगरानी और तकनीकी प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी।
अपने पद के कारण आशुतोष को CCTV कैमरों की लाइव फीड तक बिना रोक-टोक पहुंच प्राप्त थी—और इसी सुविधा का उसने दुरुपयोग किया।


कैसे हुआ खुलासा?

8 दिसंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो के साथ शिकायत पत्र वायरल हुआ। इसमें दावा किया गया था कि आशुतोष ने दंपती के निजी पलों को रिकॉर्ड कर न केवल उन्हें ब्लैकमेल किया, बल्कि 32,000 रुपये वसूलने के बाद भी वीडियो इंटरनेट पर डाल दिया।
यह पत्र सुल्तानपुर के डीएम, एसपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम लिखा गया था। वीडियो वायरल होते ही मामला तेजी से फैल गया और पुलिस हरकत में आ गई।


कई महीनों से चल रहा था काला खेल

वीडियो सामने आने के बाद यह पता चला कि यह सिर्फ एक घटना नहीं है। दो दिनों के भीतर 5–6 और पीड़ित सामने आए। उन्होंने बताया कि:

  • आशुतोष एक्सप्रेसवे पर कारों की गतिविधि को बारीकी से देखता था।

  • संदिग्ध हरकत दिखते ही वह वीडियो सेव कर लेता था।

  • फिर वह मौके पर पहुंचकर पीड़ितों को धमकाता और पैसे वसूलता था।

  • कई महिलाओं और युवतियों के फुटेज भी उसने कथित रूप से गलत तरीके से रिकॉर्ड किए।

लोग शर्म और सामाजिक बदनामी के डर से चुप थे, पर वीडियो वायरल होने के बाद कई परिवारों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।


टोल प्लाजा से लेकर गांवों तक हुई जासूसी

एफआईआर के अनुसार, आशुतोष ने कैमरों को नीचे की ओर घुमाकर आसपास के गांवों जरईकला, हलियापुर और गौहनिया की गलियों तक की निगरानी की। पुलिस का मानना है कि यह एक सुनियोजित प्रक्रिया थी जिसमें तकनीक का इस्तेमाल गलत उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।
जांच टीम अब कैमरा लॉग, फुटेज हिस्ट्री और सिस्टम के एक्सेस रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है।


कंपनी की संदिग्ध भूमिका

मामले के उजागर होते ही कंपनी ने दावा किया कि उसने आशुतोष को टर्मिनेट कर दिया है। लेकिन टर्मिनेशन लेटर पर 30 नवंबर 2025 की तारीख मिली, जबकि शिकायत 2 दिसंबर को की गई थी।
इससे संदेह बढ़ गया कि कंपनी पहले से सब जानती थी और मामले के सार्वजनिक होते ही बैकडेट में कार्रवाई दिखाने की कोशिश की गई।


आरोपी का बचाव: “मुझे फंसाया गया है”

आशुतोष सरकार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उसके कुछ सहकर्मियों ने षड्यंत्र रचकर उसे फंसाया है। उसका कहना है कि कई लोग एक्सप्रेसवे की फीड देखते हैं और सिर्फ उसे निशाना बनाया गया है।
फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ हो रही है।


पुलिस का बयान

हलियापुर थाना पुलिस ने कहा कि यह मामला निजता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है और तकनीकी व्यवस्था के दुरुपयोग का साफ उदाहरण है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि:

  • वीडियो किस-किस के पास भेजा गया

  • किसने इसे अपलोड किया

  • क्या किसी और कर्मचारी की इसमें मिलीभगत थी

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