एक घर से उठीं चार लाशें, गांव में मातम
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के टिकरी गांव से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां एक महिला ने अपनी तीन बेटियों का गला घोंटकर हत्या कर दी और इसके बाद खुद भी पंखे से लटककर जान दे दी। इस घटना से पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और हर कोई यह सवाल कर रहा है कि आखिर मां ने अपने ही बच्चों को मौत के घाट क्यों उतार दिया।
मृतकों की पहचान
पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान तेज कुमारी उर्फ माया (29 वर्ष) और उसकी तीन बेटियों गुंजन (7 वर्ष), कीतो (2 वर्ष) और मीरा (4 महीने) के रूप में हुई है। इनमें से गुंजन तेज कुमारी की सौतेली बेटी थी। उसका जन्मदिन 12 सितंबर को आने वाला था, लेकिन उससे पहले ही यह घटना घट गई।
घटना कैसे हुई?
मंगलवार देर शाम दोघट थाना क्षेत्र के टिकरी गांव में यह घटना हुई। पुलिस को सूचना मिली कि घर के भीतर चार लाशें पड़ी हैं। मौके पर पहुंचकर अधिकारियों ने दरवाजा तोड़ा तो सामने दिल दहला देने वाला नजारा था।
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तीनों बच्चियों के शव चारपाई पर पड़े थे।
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उनकी मां तेज कुमारी पंखे से लटकी हुई थी।
प्रारंभिक जांच से पता चला कि महिला ने पहले अपनी बेटियों का गला घोंटा और फिर दुपट्टे से फांसी लगा ली।
पति घर के बाहर सो रहा था
घटना के समय महिला का पति विकास घर के बाहर एक पेड़ के नीचे सो रहा था। जब उसने सुबह दरवाजा खोलने की कोशिश की और दरवाजा बंद पाया, तो उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ा और घटना का खुलासा हुआ।
पति-पत्नी में चल रहा था विवाद
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दंपति के बीच काफी समय से विवाद चल रहा था। महिला चाहती थी कि बेटियों की पढ़ाई के लिए वे शहर शिफ्ट हों, लेकिन पति विकास इसके लिए तैयार नहीं था। इसी मुद्दे पर अक्सर दोनों के बीच झगड़ा होता था।
आरोप है कि पति ने पत्नी से बात करना भी बंद कर दिया था। इस अवसाद और गुस्से में तेज कुमारी ने यह चरम कदम उठाया।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही बड़ौत के क्षेत्राधिकारी विजय कुमार और एसपी सूरज कुमार राय मौके पर पहुंचे। एसपी ने बताया कि प्राथमिक जांच में मामला घरेलू विवाद का लग रहा है।
पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
गांव में मातम और सवाल
इस घटना से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। लोग इस बात से स्तब्ध हैं कि एक मां अपने ही बच्चों का गला घोंटकर उन्हें मार सकती है। घटना के बाद से गांव में चर्चा है कि अगर दंपति के बीच विवाद था, तो उसमें मासूम बच्चों की जान क्यों गई।
निष्कर्ष
बागपत की यह घटना घरेलू कलह और अवसाद का भयावह उदाहरण है। पारिवारिक विवादों का असर किस हद तक बढ़ सकता है, यह इस घटना से साफ झलकता है। सवाल यह भी उठता है कि यदि समय रहते परिजनों और समाज ने महिला की मानसिक स्थिति पर ध्यान दिया होता, तो शायद यह चार जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
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