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बिहार: बगहा में 16 फीट लंबा मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप, 6 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

बगहा में 16 फीट लंबा मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप

बगहा (बिहार): बिहार के बगहा जिले के गौनाहा प्रखंड के माधोपुर गांव में छठ घाट की सफाई के दौरान एक 16 फीट लंबा और करीब 2.5 क्विंटल वजनी मगरमच्छ दिखाई देने से हड़कंप मच गया। मगरमच्छ ने एक मजदूर पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी जान बचाने में सफल रहा। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब 6 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित रूप से गंडक नदी में छोड़ दिया। ग्रामीणों के लिए यह घटना हैरान करने वाली थी, क्योंकि उन्होंने इस इलाके में इतना बड़ा मगरमच्छ पहली बार देखा।

मगरमच्छ की अचानक उपस्थिति से मच गया हड़कंप

गौनाहा प्रखंड के माधोपुर गांव में छठ घाट की सफाई के दौरान अचानक पोखरे से एक विशाल मगरमच्छ बाहर निकला। यह मगरमच्छ करीब 16 फीट लंबा और लगभग 2.5 क्विंटल वजनी था। जैसे ही मजदूरों ने पानी में हरकत देखी, वे घबराकर इधर-उधर भागने लगे। एक मजदूर ने जैसे ही मगरमच्छ को देखा, वह उस पर हमला करने के लिए आगे बढ़ा। हालांकि, मजदूर ने शोर मचाकर अपनी जान बचा ली। इसके बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर दौड़ने लगे।

वन विभाग की टीम ने 6 घंटे में किया रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम रेंजर विजय प्रसाद के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। टीम ने 6 घंटे तक संघर्ष किया, ताकि मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से पकड़ा जा सके। रेस्क्यू ऑपरेशन में कई वनकर्मी और स्थानीय लोग शामिल थे। वन विभाग की टीम ने काफी सावधानी से मगरमच्छ को पानी से बाहर निकाला और उसे सुरक्षित पकड़कर गंडक नदी में छोड़ दिया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और मोबाइल फोन से इस दुर्लभ दृश्य को कैद करना शुरू कर दिया।

16 फीट लंबा मगरमच्छ और ग्रामीणों का डर

रेंजर विजय प्रसाद ने बताया कि यह मगरमच्छ लगभग 16 फीट लंबा है और इसका वजन करीब 2.5 क्विंटल है। उन्होंने बताया कि मगरमच्छ को पकड़ने में काफी समय लगा, लेकिन वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित रूप से गंडक नदी में छोड़ने में सफलता प्राप्त की।

ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने इस इलाके में इतने बड़े मगरमच्छ को पहले कभी नहीं देखा था। लोग जहां एक ओर भयभीत थे, वहीं दूसरी ओर उन्हें इसे देखने की बड़ी उत्सुकता भी थी। यह घटना गांव में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही।

वन विभाग की टीम की सराहना

रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए वन विभाग की टीम ने बहुत ही सावधानी और मेहनत से काम किया। रेंजर विजय प्रसाद ने बताया कि मगरमच्छों का रेस्क्यू एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि इनका आकार और ताकत बहुत अधिक होती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के रेस्क्यू ऑपरेशन में समय लगता है, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि मगरमच्छ को बिना किसी नुकसान के नदी में छोड़ा जाए।

सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व

मगरमच्छों का गंडक नदी में रहना एक सामान्य घटना है, लेकिन इस तरह की घटना से यह साफ हो जाता है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ सकता है, खासकर जब मनुष्य जंगलों और जल स्रोतों की ओर बढ़ते हैं। इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों को ऐसे संकटों के लिए अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है।


निष्कर्ष:

बगहा के माधोपुर गांव में हुए इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रकृति और मानव का संघर्ष कभी-कभी अप्रत्याशित घटनाओं का रूप ले सकता है। हालांकि, वन विभाग के तत्पर रेस्क्यू ऑपरेशन ने इस संकट को नियंत्रण में किया और मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में वापस भेज दिया। यह घटना स्थानीय समुदाय के लिए एक चेतावनी के रूप में सामने आई है कि भविष्य में इस तरह के प्राकृतियों से जुड़ी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाए।

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