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मणिकर्णिका घाट विवाद का सच: मंदिर नहीं टूटा, चबूतरा हटाने से भड़का आक्रोश

मंदिर नहीं टूटा, चबूतरा हटाने से भड़का आक्रोश

वाराणसी (बनारस): काशी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर हाल ही में हुई तोड़-फोड़ को लेकर जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक यह सवाल गूंजा कि क्या सरकार ने किसी मंदिर या देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ दिया है। इस मामले में आठ एफआईआर दर्ज होने और पाल समाज के आंदोलन के बाद भ्रम और बढ़ गया। हालांकि, ज़मीनी सच्चाई इससे अलग है।


क्या वास्तव में कोई मंदिर तोड़ा गया?

प्रशासन और स्थानीय पुरोहितों के अनुसार, मणिकर्णिका घाट पर किसी मंदिर का विध्वंस नहीं किया गया है, न ही किसी प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ति को तोड़ा गया है। विवाद उस समय शुरू हुआ, जब घाट पर बन रहे नए आधुनिक क्रिमेटोरियम के निर्माण के दौरान एक पुरानी मढ़ी (चबूतरा) हटाई गई।

मढ़ी तोड़ने के दौरान उस पर उकेरी गई मां गंगा, अहिल्याबाई होलकर और अन्य आकृतियों वाली मूर्तियां नीचे गिर गईं, जिनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।


सोशल मीडिया से भड़की आग, दर्ज हुईं 8 एफआईआर

जैसे ही तस्वीरें सामने आईं, मामला तूल पकड़ गया। कुछ नेताओं ने पुराने काशी कॉरिडोर निर्माण की तस्वीरों को नई तस्वीरों के साथ जोड़कर सोशल मीडिया पर साझा किया। इससे यह भ्रम फैला कि एक बार फिर मंदिर तोड़े जा रहे हैं।

इसी आधार पर प्रशासन ने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिन पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप है।


अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति बना भावनात्मक मुद्दा

इंदौर से अहिल्याबाई होलकर ट्रस्ट से जुड़े लोग और स्थानीय पाल समाज मौके पर पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। लोगों का कहना है कि भले ही मंदिर न टूटा हो, लेकिन जिन मढ़ियों पर आस्था जुड़ी होती है, उनके साथ संवेदनशीलता बरतनी चाहिए थी।

स्थानीय पंडों का भी कहना है कि बुलडोजर चलाने से पहले मूर्तियों को सुरक्षित हटाया जाना चाहिए था। यही लापरवाही लोगों के गुस्से की बड़ी वजह बनी।


प्रशासन का पक्ष: मूर्तियां सुरक्षित हैं

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी मूर्तियां पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें नगर निगम की निगरानी में पुरातत्व विभाग के कार्यालय में रखा गया है। नए निर्माण कार्य के पूरा होने के बाद सभी मूर्तियों को फिर से उसी क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा


क्यों जरूरी था मणिकर्णिका घाट का पुनर्निर्माण?

मणिकर्णिका घाट लंबे समय से अव्यवस्था और जगह की कमी से जूझ रहा था।

साल 2023 में डोम राजा के आग्रह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिकर्णिका घाट पर आधुनिक क्रिमेटोरियम की योजना को मंजूरी दी थी।


विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला नया क्रिमेटोरियम

रूपा फाउंडेशन के CSR फंड से बन रहा नया मणिकर्णिका तीर्थ क्रिमेटोरियम करीब 39,000 वर्ग फीट क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यह काशी कॉरिडोर से सटा होगा और इसमें:

जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।


निष्कर्ष

मणिकर्णिका घाट पर हुआ विवाद तोड़-फोड़ से ज्यादा भावनाओं और गलत सूचना का परिणाम है। मंदिर नहीं टूटा, लेकिन परंपरा और आस्था से जुड़े स्थानों पर कार्य करते समय संवेदनशीलता जरूरी है। प्रशासन का दावा है कि निर्माण कार्य के बाद मणिकर्णिका घाट न सिर्फ अपनी गरिमा बनाए रखेगा, बल्कि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को सम्मानजनक सुविधा भी देगा।

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