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महाराष्ट्र के वाशिम में दर्दनाक हादसा: नाली में गिरकर 3 साल के मासूम की मौत, ग्राम पंचायत पर उठे सवाल

नाली में गिरकर 3 साल के मासूम की मौत

खेलते-खेलते नाली में गिरा मासूम

महाराष्ट्र के वाशिम जिले के गोंडेगांव में गुरुवार को एक हृदयविदारक हादसा हुआ। यहां 3 साल का मासूम स्वराज अपने घर के बाहर खेल रहा था। खेलते-खेलते वह पास की नाली में जा गिरा। तेज बारिश के कारण नाली पानी से लबालब भरी थी, जिससे बच्चा बहकर आगे बढ़ गया और एक बड़े सीमेंट पाइप में फंस गया।


पिता की बेबसी और दिल दहलाने वाला दृश्य

जैसे ही बच्चे के नाली में गिरने की खबर फैली, गांव में हड़कंप मच गया। परिवार और ग्रामीण उसे खोजने लगे। इस बीच मासूम के पिता नाले के दूसरे छोर पर बैठकर बिलखते रहे, ताकि अगर उनका बच्चा बहकर बाहर आए तो वे उसे तुरंत पकड़ सकें। पिता की यह बेबसी और मासूम की तलाश पूरे गांव को झकझोर गई।

करीब एक घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। JCB मशीन मंगवाकर पाइप को तोड़ा गया। जब तक बच्चा बाहर आया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गांव का हर शख्स उस मासूम की निढाल लाश देखकर रो पड़ा।


ग्राम पंचायत पर लापरवाही का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए ग्राम पंचायत को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि बीते साल ही गांव में नई नालियां बनाई गई थीं, लेकिन उनकी सही ढंग से सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। खुले नाले और बड़े पाइप की वजह से यह बड़ा हादसा हुआ।

ग्रामीणों ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को शिकायत सौंपी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।


बारिश बनी मौत का सबब

गुरुवार को वाशिम जिले में तेज बारिश हुई थी। गोंडेगांव समेत कई इलाकों में नालियां पानी से भर गई थीं। इसी दौरान मासूम बच्चा घर के पास खेलते-खेलते नाले में जा गिरा। पानी के तेज बहाव के कारण वह खुद को बचा नहीं पाया और पाइप में फंसकर दम तोड़ बैठा।


गांव में मातम और आक्रोश

इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। हर किसी की आंखें नम हैं। ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

साथ ही, लोग चाहते हैं कि नालियों को ढका जाए और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम हों।


जांच और कार्रवाई की उम्मीद

जिला परिषद प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अगर जांच में ग्राम पंचायत या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


निष्कर्ष

गोंडेगांव का यह हादसा एक चेतावनी है कि आधारभूत संरचनाओं में लापरवाही सीधे तौर पर मासूम जिंदगियों को खतरे में डाल सकती है। तीन साल के स्वराज की मौत ने न सिर्फ उसके परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी तेजी से कदम उठाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या इंतजाम किए जाते हैं।

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