उत्तराखंड में धराबली त्रासदी: रेस्क्यू युद्धस्तर पर
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में हाल ही में अचानक हुई बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचा दी। इसमें कई घर, सड़क और बाजार मलबे में दब गए। 4 लोग मारे गए और 43 अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें सेना के कम से कम 9 जवान और 7 नागरिक शामिल हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन में 220 से अधिक सेना के जवान, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें, हेलिकॉप्टर और भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौके पर जाकर इस संकट से निपटने के लिए मोर्चा संभाला है।
लोकेशन की दुर्गमता और मौसम की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बचाव कार्य जोर-शोर से जारी है।
बिहार में बाढ़ का कहर: गंगा, कोसी और गंडक उफान पर
बिहार में लगातार बारिश और नेपाल व आसपास के इलाकों से आ रहे पानी की वजह से गंगा, कोसी और गंडक नदियां खतरनाक रूप से उफान पर हैं।
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गंगा नदी पटना से कahalgaon तक कई स्थानों पर खतरे के निशान से 1 मीटर से अधिक ऊपर बह रही है।
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कोसी नदी Birpur बैराज पर 1.68 लाख क्यूसेक और गंडक नदी Valmikinagar बैराज पर 1.14 लाख क्यूसेक की प्रवाह दिखा रही है।
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Burhi Gandak (Khagaria) और Kamla Balan (Jainagar, Jhanjharpur) नदियाँ भी गंभीर स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। हालांकि, गंगा में हाल में थोड़ी तेजी के बाद सुधार की उम्मीद बन रही है।
बाढ़ से 24 गाँव प्रभावित हुए हैं, सड़कों का संपर्क टूट गया है, और राहत शिविर व सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की गई है।
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पटना में J P Ganga Path लगभग 1 लाख विस्थापितों का ठिकाना बन चुका है, जहां राहत शिविर, नौकाएँ और राशन वितरण की व्यवस्था चल रही है
तालिका: मुख्य प्रभावित क्षेत्र और राहत प्रयास
| राज्य/क्षेत्र | समस्या/स्थिति | राहत उपाय |
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| उत्तराखंड – धराली | बादल फटने से तबाही, कई लापता और मरे हुए हैं | सेना, NDRF, SDRF, हेलिकॉप्टर अभियान |
| बिहार – गंगा, कोसी, गंडक | नदियाँ खतरनाक स्तर से ऊपर; बाढ़, संपर्क टूटना | शिविर, नौकाएँ, राशन, सामुदायिक सहायता |
निष्कर्ष
उत्तराखंड में बादल फटने से उफान, और बिहार में बाढ़ से तबाही, दोनों घटनाएँ मौसम की चपेट में बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।
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प्रशासनिक और आपदा प्रबंधन की सक्रियता ज़रूरी है।
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लोगों की सुरक्षा और त्वरित राहत ही इस मंदी में सबसे बड़ा सहारा बन सकती है।

