उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित नाक रगड़वाने कांड में अब बड़ा मोड़ आ गया है। पीड़ित व्यापारी सत्यम रस्तोगी और मुख्य आरोपी विकुल चपराणा समेत अन्य पक्षों के बीच लिखित समझौता हो गया है। भाजपा जनप्रतिनिधियों की पहल पर सर्किट हाउस में गुरुवार को यह समझौता हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने विवाद खत्म करने पर सहमति जताई।
सर्किट हाउस में हुआ समझौता, दोनों पक्षों ने किए हस्ताक्षर
सूत्रों के मुताबिक, मेरठ सर्किट हाउस में भाजपा जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
इस बैठक में पीड़ित व्यापारी सत्यम रस्तोगी के पिता और आरोपी पूर्व भाजपा नेता विकुल चपराणा के मामा रणपाल सिंह, साथ ही हैप्पी भड़ाना, सुबोध, और आदेश के परिजन मौजूद रहे।
सभी पक्षों ने लिखित रूप से कहा कि वे अब इस मामले में किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करना चाहते। समझौते के कागजात पर हस्ताक्षर के बाद बैठक समाप्त हुई और माना जा रहा है कि जल्द ही इसे अदालत में पेश किया जाएगा।
पीड़ित पक्ष ने कहा – गलत धाराएं लगाई गईं
जानकारी के अनुसार, पीड़ित पक्ष की ओर से एक एफिडेविट (शपथपत्र) तैयार कराया गया है, जिसमें लिखा गया है कि मुकदमे में रंगदारी और धमकाने की धाराएं गलत तरीके से जोड़ी गईं।
शिकायत में दर्ज कुछ घटनाओं को भी “गलतफहमी” बताया गया है।
पीड़ित सत्यम रस्तोगी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि मामले का सुलहपूर्ण समाधान चाहते थे। उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया कि मामले में लगाई गई गंभीर धाराओं को हटाया जाए।
क्या था मामला
दरअसल, कुछ दिन पहले मेरठ के तेजगढ़ी चौराहे पर एक कपड़ा व्यापारी से बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
वीडियो में व्यापारी सत्यम रस्तोगी को नाक रगड़कर माफी मांगने पर मजबूर किया गया था। बताया गया कि यह विवाद पार्किंग को लेकर हुआ था।
घटना के वायरल होते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी विकुल चपराणा (पूर्व भाजपा नेता) और उसके साथियों सुबोध यादव, आयुष शर्मा, और हैप्पी भड़ाना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
पुलिस और राजनीति दोनों में मचा था हड़कंप
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने मेरठ पुलिस और भाजपा संगठन दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थीं।
घटना के बाद भाजपा नेताओं ने पहले कड़े एक्शन की मांग की थी, लेकिन अब उन्हीं जनप्रतिनिधियों की पहल पर समझौता कराया गया है।
सूत्र बताते हैं कि भाजपा संगठन नहीं चाहता था कि यह मामला पार्टी की छवि पर असर डाले। इसलिए स्थानीय नेताओं ने बीच में आकर मध्यस्थता की और दोनों परिवारों को साथ बैठाकर विवाद समाप्त कराया।
सोशल मीडिया से उठी लहर, अब मामला शांत
वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर “मेरठ नाक रगड़वाने कांड” ट्रेंड कर रहा था।
लोगों ने इसे व्यापारी वर्ग के अपमान से जोड़ा और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
लेकिन अब दोनों पक्षों के समझौते के बाद माहौल शांत होता दिख रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, समझौते की कॉपी अदालत में पेश होने के बाद मुकदमे की धाराओं पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों ने कहा – समाज में सद्भाव जरूरी
बैठक में मौजूद भाजपा जनप्रतिनिधियों ने कहा कि समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखना सबसे जरूरी है।
उन्होंने दोनों पक्षों को एकजुट होकर मामले को खत्म करने के लिए धन्यवाद दिया।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा,
“हमारा उद्देश्य किसी की राजनीतिक छवि बचाना नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच सुलह करवाना था ताकि मामला लंबा न खिंचे।”
आगे की कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, समझौते का यह दस्तावेज कोर्ट में दाखिल किया जाएगा, जिसके बाद जेल में बंद आरोपियों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
पुलिस इस समझौते की सत्यता की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी।
निष्कर्ष
मेरठ का यह विवाद, जिसने राज्यभर में सुर्खियां बटोरी थीं, अब समझौते के रास्ते शांत होता नजर आ रहा है।
भाजपा जनप्रतिनिधियों की मध्यस्थता से दोनों पक्षों के बीच सुलह हो गई है।
अब देखना यह होगा कि अदालत इस समझौते को मंजूरी देती है या नहीं — लेकिन फिलहाल, मेरठ में नाक रगड़वाने कांड पर विराम लग गया है।

