बागपत जिले के गांगनौली गांव में एक दर्दनाक वारदात ने पूरे इलाके को हिला दिया है। बड़ी मस्जिद में तालीम देने वाले मुफ्ती इब्राहिम की दुनिया एक झटके में बर्बाद हो गई। उनकी पत्नी इसराना और दो नन्हीं बेटियों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। वारदात के बाद से मुफ्ती गहरे सदमे में हैं और उन्होंने मस्जिद व गांव दोनों छोड़ दिए हैं।
गांगनौली की बड़ी मस्जिद में तालीम देते थे मुफ्ती इब्राहिम
थाना दोघट क्षेत्र के गांगनौली गांव की बड़ी मस्जिद में रहने वाले मुफ्ती इब्राहिम मूल रूप से शामली जिले के सुन्ना गांव के रहने वाले हैं। पिछले चार साल से वे यहां बच्चों को कुरान की तालीम दे रहे थे।
मस्जिद के निचले हिस्से में बच्चों की कक्षाएं चलती थीं, जबकि ऊपर के कमरे में वे अपनी पत्नी इसराना और दो बेटियों के साथ रहते थे।
गांव के लोग उन्हें शांत, सादगीभरा और धार्मिक इंसान बताते हैं। सब कुछ सामान्य था — लेकिन 11 अक्टूबर 2025 की शाम उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।
छात्रों की डांट से नाराज होकर रची गई साजिश
पुलिस के अनुसार, मस्जिद में पढ़ने वाले दो नाबालिग छात्रों ने ही इस वारदात को अंजाम दिया। बताया गया कि मुफ्ती और उनकी पत्नी ने कुछ दिन पहले बच्चों को पढ़ाई में लापरवाही करने पर डांटा था।
यही बात दोनों को नागवार गुजरी, और उन्होंने एक खौफनाक योजना बना डाली। मौके का फायदा उठाकर, मुफ्ती की गैरमौजूदगी में वे घर में घुस गए और मुफ्ती की पत्नी और दोनों बच्चियों की हत्या कर दी।
जब मुफ्ती घर लौटे तो सामने जो दृश्य था, उसने उनकी पूरी दुनिया उजाड़ दी। खून से सनी दीवारें, बिखरा सामान और तीनों की निर्जीव लाशें देखकर गांव में मातम छा गया।
पुलिस ने पकड़े आरोपी, लेकिन दर्द नहीं मिटा
वारदात की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। थोड़ी ही देर में दोनों नाबालिग छात्रों को हिरासत में ले लिया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ में दोनों ने जुर्म कबूल कर लिया है। उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है।
हालांकि, इस गिरफ्तारी से मुफ्ती इब्राहिम को कोई सुकून नहीं मिला। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा,
“मेरी दुनिया उजड़ गई… बीवी-बच्चे सब चले गए… अब मेरा यहां क्या बचा।”
उनकी आंखों में आंसू सूख चुके थे और आवाज में सिर्फ टूटन बाकी थी।
‘जहां बीवी-बच्चों का खून बहा, वहां नहीं रह सकता’
घटना के बाद मुफ्ती ने गांव और मस्जिद दोनों को अलविदा कह दिया।
गांव छोड़ते वक्त उन्होंने बस इतना कहा,
“जहां मेरी बीवी-बच्चों का खून बहा, मैं अब वहां नहीं रह सकता।”
अब वे अपने पैतृक गांव सुन्ना (शामली) लौट गए हैं।
गांव के लोग बताते हैं कि उन्हें बहुत समझाया गया, लेकिन वे नहीं माने।
मस्जिद में सन्नाटा, गांव में सिहरन
गांगनौली की बड़ी मस्जिद का बरामदा अब वीरान पड़ा है। जहां कभी बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा है।
ग्रामीण अब्दुल कयूम ने बताया,
“मुफ्ती बहुत नेक इंसान थे। जो हुआ, गलत हुआ। हमने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वो रोते हुए चले गए। पुलिस ने केस खोला, यह अच्छी बात है, पर वो दर्द कौन भरेगा?”
गांव के कई लोग आज भी इस वारदात के सदमे में हैं। कोई विश्वास नहीं कर पा रहा कि धार्मिक शिक्षा लेने आए दो किशोर ऐसी निर्मम हरकत कर सकते हैं।
जांच जारी, इंसाफ की उम्मीद में गांव
पुलिस ने दोनों नाबालिग आरोपियों को सुधार गृह भेजने की तैयारी की है। वहीं, फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं।
थाना प्रभारी ने बताया कि हत्या के पीछे का सही कारण जानने के लिए पूछताछ जारी है।
इस घटना ने पूरे बागपत जिले में आक्रोश और दुख दोनों को जन्म दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मासूम बच्चियों और एक बेगुनाह महिला की हत्या ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है।
निष्कर्ष: एक त्रासदी जिसने सबको झकझोर दिया
मुफ्ती इब्राहिम की यह दर्दनाक कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस समाज का आईना है जहां नफरत और गुस्सा मासूमियत पर हावी हो गया।
अब बागपत की मस्जिद की दीवारें गवाही दे रही हैं — एक ऐसे इंसान की, जिसने सब कुछ खोकर सिर्फ अल्लाह का नाम बचाया।

