रूस में पढ़ाई कर रहे राजस्थान के छात्र की दर्दनाक मौत
राजस्थान के अलवर जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के कफनवाड़ा गांव के रहने वाले 22 वर्षीय अजीत चौधरी का शव रूस के उफ़ा शहर में एक बांध (डैम) के पास मिला है। अजीत रूस में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था और 19 अक्टूबर से लापता था।
परिजनों का कहना है कि बेटे को डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए भेजने के लिए उन्होंने अपनी तीन बीघा जमीन तक बेच दी थी। अजीत की मौत की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
19 अक्टूबर से था लापता, दूध लेने निकला था छात्र
जानकारी के अनुसार, अजीत चौधरी बश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी (Bashkir State Medical University) में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। वह साल 2023 में रूस गया था और उफ़ा शहर में यूनिवर्सिटी हॉस्टल में रह रहा था।
19 अक्टूबर की सुबह करीब 11 बजे अजीत अपने दोस्तों से यह कहकर निकला था कि वह दूध लेकर आधे घंटे में लौट आएगा, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटा। कई दिनों तक दोस्तों और विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चला।
अंततः 31 अक्टूबर को रूस के व्हाइट रिवर (White River) के पास स्थित एक बांध में अजीत का शव मिला।
भारतीय दूतावास ने दी परिजनों को जानकारी
अलवर के सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सागवान ने बताया कि रूस में स्थित भारतीय दूतावास ने उन्हें सूचना दी कि लापता छात्र अजीत चौधरी का शव मिल गया है। शव की पहचान अजीत के साथ पढ़ने वाले अन्य भारतीय छात्रों ने की है।
सागवान ने बताया,
“विदेश मंत्रालय और रूस स्थित भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में हैं। शव का पोस्टमॉर्टम रूस में मेडिकल बोर्ड से कराया जा रहा है, जिसके बाद उसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। संभवतः दो से तीन दिन में शव भारत पहुंच जाएगा।”
गांव में मातम, पिता और दादा का रो-रोकर बुरा हाल
अजीत चौधरी के निधन की खबर मिलते ही कफनवाड़ा गांव में मातम छा गया।
परिवार का कहना है कि उन्होंने बेटे का सपना पूरा करने के लिए तीन बीघा जमीन बेच दी थी, ताकि वह डॉक्टर बन सके और परिवार का नाम रोशन करे। लेकिन अब उसके शव की खबर ने सबको तोड़ दिया है।
अजीत के पिता और दादा का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण और रिश्तेदार लगातार घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना देने में जुटे हैं।
छात्र संगठन और समाज ने जताया आक्रोश
अलवर में जाट छात्रावास में इस घटना को लेकर एक बैठक हुई, जिसमें समाज के लोगों ने रूस में जांच और खोज अभियान में लापरवाही का आरोप लगाया।
लोगों ने कहा कि अगर समय पर उचित कार्रवाई की जाती तो शायद अजीत की जान बच सकती थी।
संगठन ने भारत सरकार से मांग की है कि —
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इस घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए,
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रूस में पढ़ने वाले अन्य भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए,
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और अजीत के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए।
अजीत का सपना अधूरा रह गया
परिजनों और दोस्तों के अनुसार, अजीत शुरू से ही मेहनती और होनहार छात्र था। उसका सपना था कि वह डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करे।
परिवार ने उसे रूस भेजने के लिए अपनी पारिवारिक जमीन बेचकर खर्च जुटाया था।
लेकिन अब उसका यह सपना अधूरा ही रह गया।
विदेश मंत्रालय ने शुरू की प्रक्रिया, जल्द लाया जाएगा शव
विदेश मंत्रालय ने रूस में स्थित भारतीय दूतावास और रूसी प्रशासन के साथ मिलकर शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शव को पोस्टमॉर्टम के बाद भारत लाने में लगभग दो से तीन दिन का समय लगेगा।
स्थानीय प्रशासन और समाज के लोग परिवार के संपर्क में हैं और हर संभव मदद देने का आश्वासन दे रहे हैं।
निष्कर्ष
रूस में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे राजस्थान के अजीत चौधरी की मौत ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे दुख में डुबो दिया है।
यह घटना विदेश में पढ़ने जाने वाले छात्रों की सुरक्षा और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सरकार और समाज दोनों के लिए यह समय है कि ऐसे छात्रों और उनके परिवारों को संवेदनात्मक और आर्थिक सहायता दी जाए ताकि कोई और परिवार ऐसी त्रासदी का शिकार न हो।

