लखनऊ को मिलेगा आधुनिक जल परिवहन का तोहफा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जल्द ही देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकती है, जहां सड़क और रेल के साथ-साथ आधुनिक जल परिवहन (वाटर मेट्रो) की सुविधा उपलब्ध होगी। गोमती नदी में वाटर मेट्रो शुरू होने से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी, बल्कि लोगों को सस्ता, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल सफर भी मिलेगा।
परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी
प्रदेश सरकार परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और हरित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में रविवार, 4 जनवरी को लखनऊ में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह और कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड के निदेशक संजय कुमार के बीच गोमती नदी में वाटर मेट्रो चलाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
गोमती नदी में वाटर मेट्रो पूरी तरह संभव
कोच्चि मेट्रो के तकनीकी विशेषज्ञों ने बैठक में गोमती नदी पर जल परिवहन की तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि उचित योजना और बुनियादी ढांचे के साथ गोमती नदी में वाटर मेट्रो चलाना पूरी तरह संभव है।
परिवहन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए और सभी जरूरी प्रक्रियाएं जल्द पूरी की जाएं।
पहले चरण में होंगे ये काम
परियोजना की शुरुआत से पहले कई अहम तैयारियां की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं:
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नेविगेशनल एड्स (नदी में सुरक्षित यात्रा के संकेत)
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इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम
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पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव का अध्ययन
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टर्मिनल और जेट्टी का निर्माण
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बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं
इन सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इसके बाद बजट स्वीकृति के लिए प्रस्ताव सरकार के सामने रखा जाएगा।
यूपी के इन शहरों में भी चलेगी वाटर मेट्रो
लखनऊ के अलावा उत्तर प्रदेश के कई अन्य शहरों में भी वाटर मेट्रो की योजना बनाई जा रही है। इनमें शामिल हैं:
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मथुरा से आगरा तक यमुना नदी
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गोरखपुर का रामगढ़ ताल
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बलिया का सुरहा ताल
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गंगा नदी के किनारे बसे प्रमुख शहर
इसके अलावा अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज के लिए पहले ही तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है।
कोच्चि वाटर मेट्रो से ली गई प्रेरणा
यह परियोजना केरल की कोच्चि वाटर मेट्रो से प्रेरित है, जहां नदियों और बैकवाटर्स पर इलेक्ट्रिक बोट्स के जरिए मेट्रो जैसी सेवा सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। उत्तर प्रदेश में भी इसी तर्ज पर इलेक्ट्रिक बोट्स का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे प्रदूषण नहीं होगा और ईंधन की बचत होगी।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
अधिकारियों के अनुसार, वाटर मेट्रो से न सिर्फ शहरों में यातायात दबाव कम होगा, बल्कि पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों में श्रद्धालु और पर्यटक नदी के रास्ते सुगम यात्रा कर सकेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
जाम और प्रदूषण से राहत की उम्मीद
यह परियोजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन का हिस्सा मानी जा रही है। वाटर मेट्रो शुरू होने से लोग सड़कों के जाम से बचकर नदी के रास्ते आरामदायक सफर कर सकेंगे। आने वाले वर्षों में लखनऊ समेत कई शहरों की परिवहन व्यवस्था और तस्वीर दोनों बदलने की उम्मीद है।
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