राजस्थान पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई की विस्तृत क्राइम कुंडली तैयार की है। यह डोजियर न केवल उसके बढ़ते गैंग नेटवर्क का खुलासा करता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे भारत के साथ-साथ यूरोप और अमेरिका तक उसकी आपराधिक पकड़ फैली हुई है। पुलिस के मुताबिक अनमोल कई गंभीर अपराधों—फिरौती, सुपारी किलिंग, हथियार तस्करी, ड्रग सप्लाई और नाबालिगों की भर्ती—में सीधे तौर पर शामिल रहा है।
कौन है अनमोल बिश्नोई?
अनमोल बिश्नोई उर्फ भानू, पंजाब के फाजिल्का जिले के गांव दुतारावाली का रहने वाला है। वह लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई है और पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आपराधिक गिरोह संचालित करता आ रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर 31 से ज्यादा केस दर्ज हैं, जिनमें से 22 केस राजस्थान में हैं।
कैसे अपराध की दुनिया से जुड़ा अनमोल
लॉरेंस बिश्नोई ने 2011 में SOPU संगठन बनाकर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति शुरू की थी। इसी दौरान उस पर कई हमले और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हुए और विरोधी गैंगों से दुश्मनी बढ़ती गई।
2016 में अनमोल पढ़ाई के लिए जोधपुर आया, लेकिन वहां भी उस पर हमले और अवैध हथियार रखने से जुड़े तीन केस दर्ज हुए। इसी दौरान वह लॉरेंस के गैंग की गतिविधियों का हिस्सा बनने लगा और कारोबारियों से फिरौती वसूली जैसे मामलों में शामिल हो गया।
जेल से लॉरेंस, बाहर गोल्डी और अनमोल—ऐसे चलता था पूरा गैंग
लॉरेंस 2015 से जेल में है, लेकिन वहां से भी मोबाइल फोन के जरिए गैंग को निर्देश देता रहा। बाहर से गोल्डी बराड़ और अनमोल बिश्नोई शूटरों को तैयार करते, उन्हें हथियार उपलब्ध कराते और फिरौती व हत्या की वारदातों को अंजाम दिलाते थे।
हर वारदात के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खुलकर जिम्मेदारी ली जाती थी, ताकि डर फैलाया जा सके और नए युवाओं को अपराध की ओर खींचा जा सके।
विदेश से चलता अपराध का बड़ा नेटवर्क
राजस्थान पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, अनमोल का नेटवर्क पुर्तगाल, इटली, अमेरिका, बुल्गारिया, तुर्की और दुबई तक फैला हुआ है। उसका गैंग कई तरह की आपराधिक गतिविधियाँ संचालित करता था:
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अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना
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VPN अकाउंट देना
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फरार आरोपियों को ठिकाने मुहैया कराना
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अवैध हथियार और गोलाबारूद उपलब्ध कराना
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ड्रग तस्करी
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नए शार्प शूटर्स की भर्ती और ट्रेनिंग
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फर्जी आईडी तैयार करना
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नाबालिगों को अपराध में शामिल करना
पुलिस का कहना है कि गैंग के कम से कम 18 सदस्य विदेशों में रहते हैं, जबकि 9 अपराधी हाल ही में फर्जी पासपोर्ट बनवाकर देश से भागे हैं।
हाई-प्रोफाइल शूटआउट में शामिल रहा अनमोल
इंटरपोल की रेड नोटिस जारी होने के बावजूद अनमोल VOIP कॉल्स और इंटरनेशनल नंबर्स का इस्तेमाल कर विदेश से गैंग चलाता रहा।
इस दौरान गैंग ने तीन हाई-प्रोफाइल शूटआउट किए, जिनमें 6 लोगों की हत्या की गई।
वारदातों में उपयोग किए गए हथियार तुर्की में बने जिगाना पिस्तौल और चीन निर्मित हथियार बताए जाते हैं। कई वारदातों के वीडियो सोशल मीडिया पर डालकर गैंग ने खुलकर जिम्मेदारी ली, जिससे आम लोगों में भय का माहौल बन गया।
नाबालिगों को अपराध में धकेलने का आरोप
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अनमोल बिश्नोई गिरोह ने कई नाबालिग लड़कों को विदेश ले जाने का लालच देकर उनकी रेकी और फायरिंग जैसी वारदातों में इस्तेमाल किया।
2017 में जोधपुर के व्यापारी वासुदेव की हत्या में भी अनमोल की भूमिका सामने आई थी। फिरौती नहीं देने पर शूटर्स को ठिकाना उसी ने उपलब्ध कराया था।
31 केस और लंबी फरारी—अब भी विदेशी जमीन से सक्रिय
अनमोल के खिलाफ राजस्थान और पंजाब में हत्या, हत्या की कोशिश, फिरौती और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले लंबित हैं।
राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित थाना सदर में FIR नंबर 73/2022 के तहत उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी है।

