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हिमाचल में छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में फिजिक्स शिक्षक बर्खास्त, पॉक्सो एक्ट के तहत हुई कार्रवाई

हिमाचल में छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में फिजिक्स शिक्षक बर्खास्त

मामले का पूरा विवरण

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत फिजिक्स शिक्षक राकेश कुमार को राज्य सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई छात्राओं से छेड़छाड़, अनुचित आचरण और पॉक्सो एक्ट के उल्लंघन के आरोपों के चलते की गई है। शिक्षक पर पहले भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी थी और वे कुछ समय के लिए न्यायिक हिरासत में भी रह चुके हैं।


पिछली तैनाती में सामने आए गंभीर आरोप

जानकारी के अनुसार, राकेश कुमार की पहली तैनाती सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में थी, जहां उनके खिलाफ छात्राओं से अनुचित व्यवहार की कई शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद 9 मई, 2023 को उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354A (यौन उत्पीड़न) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 11 के तहत FIR दर्ज की गई थी।


जांच प्रक्रिया और न्यायिक कार्यवाही

राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए 6 सितंबर, 2023 को विभागीय जांच शुरू की थी। जांच की ज़िम्मेदारी राजकीय डिग्री कॉलेज, पांवटा साहिब के प्राचार्य वैभव कुमार शुक्ला को सौंपी गई।
राकेश कुमार ने जांच रुकवाने के लिए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर जांच पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।


जांच रिपोर्ट में खुलासा

जांच अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी शिक्षक द्वारा आरोपों के खंडन में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ प्रामाणिक नहीं पाए गए। उन्होंने आरोपों को झूठा साबित करने में असफलता दिखाई। इसके अलावा, यह तथ्य कि आरोपी 9 मई से 3 जून, 2023 तक न्यायिक हिरासत में रहे, इस बात को और गंभीर बनाता है।


सरकार का कड़ा रुख: तत्काल बर्खास्तगी

जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए स्कूल शिक्षा निदेशक ने राकेश कुमार को सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। रिपोर्ट में यह स्पष्ट कहा गया कि “कदाचार की गंभीरता, नैतिक पतन और छात्रों की सुरक्षा के मद्देनज़र राकेश कुमार सरकारी सेवा में बने रहने के योग्य नहीं हैं।”


निष्कर्ष

यह मामला दर्शाता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार छात्रों की सुरक्षा और शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर है। इस तरह की सख्त कार्रवाई न केवल पीड़ितों को न्याय देती है, बल्कि भविष्य में ऐसे कृत्यों को रोकने में भी मदद करती है।

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