44 प्लॉट, 1 किलो सोना, 2 किलो चांदी और सवा करोड़ रुपये… सरकारी कर्मचारी की संपत्ति देख फटी रह गईं आंखें

44 प्लॉट, 1 किलो सोना, 2 किलो चांदी और सवा करोड़ रुपये

ओडिशा में मोटर वाहन निरीक्षक के पास खुलासा हुआ अकूत संपत्ति का, जांच जारी


सतर्कता विभाग की कार्रवाई में हुआ बड़ा खुलासा

ओडिशा के बौध जिले में तैनात सरकारी कर्मचारी गोलाप चंद्र हांसदा के खिलाफ चल रही जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सतर्कता विभाग ने उनके घर पर छापेमारी करते हुए उनकी अकूत संपत्ति का खुलासा किया है। जांच के दौरान उनके पास 44 प्लॉट, 1 किलो सोना, 2.126 किलो चांदी, और 1.34 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक बैलेंस का पता चला है। इसके अलावा, जांच टीम को 2.38 लाख रुपये कैश और एक डायरी भी मिली है, जिसमें बेनामी संपत्ति के लेन-देन का पूरा ब्यौरा दर्ज है।


एक सरकारी कर्मचारी की इतनी संपत्ति?

यह सवाल अब सबके जेहन में उठ रहा है कि क्या कोई साधारण सरकारी कर्मचारी, जो मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) के पद पर तैनात है, अपनी सैलरी से 44 प्लॉट, 1 किलो सोना, 2 किलो चांदी, और करोड़ों रुपये की संपत्ति बना सकता है? सतर्कता विभाग ने इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए छानबीन शुरू की है। हांसदा के खिलाफ यह जांच एक गोपनीय शिकायत के बाद शुरू की गई थी, और छापेमारी के बाद उनकी संपत्तियों के आंकड़े अधिकारियों को चौंका गए।


हांसदा की संपत्ति की विस्तृत जानकारी

सतर्कता विभाग की छापेमारी में हांसदा और उनके परिवार के पास मिली संपत्तियों का ब्यौरा बेहद चौंकाने वाला था। उनकी संपत्ति में 44 प्लॉट, 1 किलो सोना, और 2.126 किलो चांदी शामिल हैं। इसके अलावा, उनके बैंक खाते में 1.34 करोड़ रुपये जमा हैं, और उन्हें 2.38 लाख रुपये कैश भी मिले हैं।

डायरी में यह जानकारी भी सामने आई कि हांसदा ने अपनी बेटी की मेडिकल पढ़ाई पर 40 लाख रुपये खर्च किए हैं। इन संपत्तियों में से 43 प्लॉट तो बारिपदा शहर और उसके आसपास के इलाकों में हैं, और एक प्लॉट बालासोर के बाहरी हिस्से में पाया गया। इन भूमि की रजिस्ट्री कीमत 1.49 करोड़ रुपये बताई जा रही है, हालांकि बाजार में इनकी कीमत इससे कहीं अधिक हो सकती है।


1991 से सरकारी सेवा में हैं हांसदा

गोलाप चंद्र हांसदा ने 1991 में सरकारी सेवा में कदम रखा था। पहले उन्होंने संभलपुर और देवगढ़ के जिला उद्योग केंद्र में काम किया, और बाद में 2003 में उन्हें जूनियर एमवीआई के तौर पर प्रमोट किया गया। हांसदा ने कई जिलों में अपनी सेवा दी और 2020 में वह बौध आरटीओ ऑफिस में पूर्ण एमवीआई के रूप में तैनात हुए, जहां वह अभी तक कार्यरत हैं। उनका मासिक वेतन 1.08 लाख रुपये है, यानी उनकी सालाना आय लगभग 13 लाख रुपये के आसपास है।

अब यह सवाल उठता है कि इस आय से इतनी संपत्ति कैसे बनाई गई?


सतर्कता विभाग की जांच और डायरी की भूमिका

सतर्कता विभाग ने अब हांसदा की संपत्तियों और लेन-देन का मूल्यांकन करना शुरू कर दिया है। विभाग की तकनीकी टीम इन सभी संपत्तियों की माप और बाजार मूल्य का आकलन कर रही है, और यह भी जांच रही है कि इन संपत्तियों को किस स्रोत से खरीदा गया। साथ ही, हांसदा के करीबी रिश्तेदारों, पत्नी और अन्य परिजनों के खातों की भी जांच की जा रही है, क्योंकि यह माना जा रहा है कि बेनामी संपत्तियों के लेन-देन में उनके रिश्तेदार भी शामिल हो सकते हैं।

सतर्कता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस डायरी में बेनामी संपत्तियों के लेन-देन के बारे में विस्तृत जानकारी दर्ज है। यह डायरी इस पूरे मामले में अहम सबूत साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें संपत्ति खरीदने और निवेश करने की तारीखें और रकम की जानकारी है।


आगे की कार्रवाई और संभावित खुलासे

विजिलेंस विभाग का कहना है कि यह छानबीन के शुरुआती चरण में है, और आगे की जांच में और भी संपत्तियों और लेन-देन का खुलासा हो सकता है। यदि हांसदा दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें संपत्ति जब्ती और निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है।


निष्कर्ष

ओडिशा के सरकारी कर्मचारी गोलाप चंद्र हांसदा के खिलाफ चल रही जांच ने यह साबित कर दिया कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा अवैध संपत्ति अर्जित करने के मामलों में काफी गहरे नेटवर्क हो सकते हैं। यह केस भविष्य में सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति की जांच और कड़ी निगरानी की ओर इशारा करता है।

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