परिचय
चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक राजनीति में नया रंग भर दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की गर्मजोशी भरी मुलाकात ने दुनिया को यह संदेश दिया कि उभरती महाशक्तियां अब अमेरिकी दबदबे को चुनौती देने के लिए एकजुट हो रही हैं।
तीन दिग्गज नेताओं की मुलाकात
सोमवार सुबह तियानजिन में जब तीनों नेता आमने-सामने आए तो यह नजारा ऐतिहासिक माना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीच में थे और दोनों ओर राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जिनपिंग खड़े थे। तीनों नेता अपने दुभाषियों के साथ हल्की-फुल्की बातचीत करते दिखे।
मुलाकात के दौरान बॉडी लैंग्वेज बेहद सकारात्मक रही। इस दौरान पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा – “तियानजिन में बातचीत जारी! SCO शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ विचारों का आदान-प्रदान।”
शी जिनपिंग का अमेरिका को कड़ा संदेश
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शिखर सम्मेलन के उद्घाटन में अमेरिका पर परोक्ष हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां धमकाने और दबाव डालने की रणनीति अपनाती हैं, लेकिन SCO देशों को एकजुट होकर ऐसे व्यवहार का विरोध करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व व्यवस्था में न्याय और बहुपक्षीयता ही आगे का रास्ता है। संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक शासन में और बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।
आर्थिक सहयोग और निवेश
शी जिनपिंग ने बताया कि SCO देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्थाएं अब 30 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच चुकी हैं। उन्होंने एक नए SCO विकास बैंक की स्थापना का प्रस्ताव रखा और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष केंद्र बनाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि चीन का SCO देशों में निवेश पहले ही 84 अरब डॉलर पार कर चुका है। साथ ही, चीन जरूरतमंद सदस्य देशों में जीवन स्तर सुधारने के लिए 100 लघु परियोजनाएं लागू करेगा।
एकजुटता और साझेदारी का आह्वान
शी जिनपिंग ने सभी सदस्य देशों से मतभेदों को किनारे रखकर आपसी सहयोग और रणनीतिक संवाद को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि SCO सिर्फ आर्थिक मंच नहीं है, बल्कि यह संस्कृतियों और सभ्यताओं के बीच सद्भाव और सहयोग को बढ़ावा देने वाला संगठन है।
पुतिन और मोदी की भूमिका
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी बहुपक्षवाद और आपसी सहयोग पर जोर दिया। वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए साझा प्रयासों की आवश्यकता बताई।
तीनों नेताओं की साझा मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि भारत, रूस और चीन का त्रिकोण वैश्विक भू-राजनीति में संतुलन बदल सकता है।

निष्कर्ष
तियानजिन में हुई मोदी-जिनपिंग-पुतिन की यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह नए वर्ल्ड ऑर्डर की नींव का प्रतीक भी मानी जा रही है। इस तिकड़ी का संदेश साफ है— दुनिया को अब एकतरफा दबदबे नहीं बल्कि साझेदारी और बहुपक्षवाद की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
इस मुलाकात ने अमेरिका सहित पश्चिमी देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आने वाले समय में वैश्विक राजनीति का केंद्र एशिया की ओर शिफ्ट हो रहा है।
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