दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आखिरकार 95 लोधी एस्टेट का टाइप-7 सरकारी बंगला मिल गया है। यह बंगला उन्हें लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आवंटित किया गया है। इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) को केंद्र सरकार के खिलाफ अदालत में मुकदमा लड़ना पड़ा। 2013 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद केजरीवाल ने सरकारी आवास से दूरी बनाई थी, लेकिन अब उन्हें सरकारी आवास आवंटित करने के लिए कानूनी संघर्ष करना पड़ा।
95 लोधी एस्टेट में नया आवास
अरविंद केजरीवाल को नया सरकारी बंगला 95 लोधी एस्टेट में मिला है। इससे पहले, यह बंगला भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के नेता इकबाल सिंह लालपुरा को आवंटित किया गया था, जो राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे। इसके बाद, यह बंगला अब दिल्ली के मुख्यमंत्री को दिया गया है, जिसके लिए आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार से कड़ा मुकाबला किया।
कानूनी लड़ाई का इतिहास
अरविंद केजरीवाल ने 2013 में दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली थी, लेकिन उस समय उन्होंने अपने लिए सरकारी आवास का चुनाव नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने सादगी की मिसाल पेश करते हुए खुद का घर अपनाया। 2024 में दिल्ली मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद, अरविंद केजरीवाल और उनका परिवार सिविल लाइंस स्थित 6 फ्लैगस्टाफ मार्ग बंगले से बाहर चले गए थे।
दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए सरकारी आवास आवंटित करने का प्रावधान नहीं होने के कारण, केजरीवाल को नए आवास के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। दिल्ली में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद आमतौर पर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला आवंटित नहीं किया जाता है, लेकिन केजरीवाल की पार्टी AAP ने इसे लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। पार्टी का कहना था कि एक राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक होने के नाते, केजरीवाल को टाइप-8 या टाइप-7 का बंगला आवंटित किया जाना चाहिए।
दिल्ली उच्च न्यायालय की फटकार
आखिरकार दिल्ली उच्च न्यायालय की फटकार के बाद, केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों ने केजरीवाल को सरकारी आवास आवंटित करने का फैसला लिया। न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करें, जिसके बाद 95 लोधी एस्टेट का टाइप-7 बंगला आवंटित किया गया।
केजरीवाल और उनके परिवार की नई शुरुआत
केजरीवाल और उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल अब 95 लोधी एस्टेट में अपने नए घर में शिफ्ट हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, अरविंद केजरीवाल और उनका परिवार नए बंगले में जल्द ही पूरी तरह से शिफ्ट हो सकता है। आमतौर पर नए सरकारी आवास में नवीनीकरण और बदलाव किए जाते हैं, जिसके बाद केजरीवाल और उनका परिवार इस नए पते पर रहने के लिए तैयार हो जाएगा।
AAP की भूमिका
आम आदमी पार्टी ने इस कानूनी लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है। AAP के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने केजरीवाल से आग्रह किया था कि वह 5 फिरोजशाह रोड पर शिफ्ट हो जाएं, जो पहले टाइप VII के बंगले के तौर पर आवंटित था। हालांकि, केजरीवाल ने अपनी पार्टी के लिए टाइप-7 या टाइप-8 बंगला आवंटित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी, और अंततः यह टाइप-7 बंगला उन्हें 95 लोधी एस्टेट में आवंटित किया गया।
निष्कर्ष
अरविंद केजरीवाल को 95 लोधी एस्टेट का सरकारी आवास मिलना एक महत्वपूर्ण घटना है, जो एक लंबी कानूनी लड़ाई का परिणाम है। यह कदम AAP की जीत और पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि एक राष्ट्रीय पार्टी के प्रमुख को सरकारी आवास मिलने का अधिकार होना चाहिए। इस नए आवास के साथ, केजरीवाल और उनकी पार्टी की राजनीतिक यात्रा में एक और अध्याय जुड़ गया है, और यह दिल्ली में सादगी और सेवाभाव के प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है।

