राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का पहला दौर खत्म: ‘एटम बम’ के बाद ‘हाइड्रोजन बम’ की तैयारी?

राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का पहला दौर खत्म

पटना में समापन, 16 दिन में 23 जिलों की यात्रा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का पहला चरण पटना में संपन्न हो गया है। 16 दिनों तक चली इस यात्रा में दोनों नेताओं ने लगभग 1300 किलोमीटर का सफर तय कर 23 जिलों को कवर किया। यात्रा के दौरान भीड़ उमड़ी, कार्यकर्ताओं में जोश दिखा और विपक्ष ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। सवाल यह है कि क्या इस यात्रा से कांग्रेस और महागठबंधन अपने असली मकसद यानी 2025 विधानसभा चुनाव की राह आसान कर पाएंगे?


राहुल गांधी का ‘हाइड्रोजन बम’ वाला बयान

पटना में आयोजित रैली के दौरान राहुल गांधी ने कहा—
“वोट चोरी का एटम बम हमने पहले ही फोड़ा है, अब बीजेपी को बता दूं कि उससे भी बड़ा हाइड्रोजन बम आने वाला है। जब यह फटेगा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को अपना चेहरा नहीं दिखा पाएंगे।”

इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि राहुल गांधी आगे ‘वोट चोरी’ पर बड़ा खुलासा कर सकते हैं। इससे बीजेपी के खिलाफ सियासी माहौल को और तेज करने की रणनीति नजर आती है।


यात्रा के दौरान राहुल की जनता से नजदीकी

इस यात्रा में राहुल गांधी ने पूरी तरह से देसी अंदाज अपनाया। उन्होंने गांवों में रुककर लोगों से संवाद किया, दलित बस्तियों में चाय पी, मोटरसाइकिल पर सफर किया और सीधे मतदाताओं से जुड़ने का प्रयास किया। उनकी बहन प्रियंका गांधी भी कुछ दिनों के लिए यात्रा में शामिल हुईं, जिससे कार्यकर्ताओं का उत्साह और बढ़ा।

यात्रा के जरिए राहुल और तेजस्वी ने केवल ‘वोट चोरी’ का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि जाति जनगणना और आरक्षण जैसे अहम सवालों पर भी माहौल बनाया। राहुल गांधी ने ऐलान किया कि अगर इंडिया ब्लॉक की सरकार बनी तो 50% आरक्षण की सीमा हटाई जाएगी।


कांग्रेस-आरजेडी की रणनीति और राजनीतिक संदेश

बिहार में कांग्रेस 35 सालों से सत्ता से बाहर है, जबकि आरजेडी अपने दम पर 20 साल से सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है। ऐसे में राहुल-तेजस्वी की यह यात्रा विपक्षी एकजुटता और जनता से जुड़ाव का प्रयास मानी जा रही है।

यात्रा के जरिए कांग्रेस ने अपनी ‘बार्गेनिंग पावर’ बढ़ाई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस लंबे समय बाद बिहार की ज़मीन पर सक्रिय और उत्साहित दिख रही है। हालांकि, यह उत्साह वोटों में तब्दील होगा या नहीं, यह चुनावी नतीजे तय करेंगे।


एनडीए के गढ़ में घुसने की कोशिश

यात्रा ने उन 110 विधानसभा सीटों को कवर किया, जिनमें से करीब 80 सीटें एनडीए के कब्जे में हैं। 2020 के चुनाव में कांग्रेस इनमें से सिर्फ 9 सीटें जीत पाई थी। इस बार राहुल गांधी ने इन्हीं इलाकों में माहौल बनाकर बीजेपी-जेडीयू को सीधी चुनौती देने की कोशिश की है।


नीतीश कुमार की कल्याणकारी योजनाओं की काट?

वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी चुनावी मैदान में बढ़त बनाने के लिए कई फ्रीबी योजनाओं का ऐलान किया है। इनमें 125 यूनिट मुफ्त बिजली, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, 1 करोड़ नौकरियां-रोजगार और महिलाओं को आर्थिक मदद जैसे वादे शामिल हैं।

तेजस्वी यादव इन योजनाओं को “नकली और महागठबंधन की नकल” बताते हैं। उनका कहना है कि असली विजन महागठबंधन के पास है और एनडीए सिर्फ उसकी नकल कर रहा है।


निष्कर्ष: क्या कांग्रेस का बिहार वनवास खत्म होगा?

राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने कांग्रेस और आरजेडी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी है। यात्रा के जरिए कांग्रेस ने यह संदेश दिया है कि वह सिर्फ दिल्ली तक सीमित पार्टी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ने को तैयार है।

हालांकि, असली परीक्षा 2025 विधानसभा चुनाव में होगी। क्या कांग्रेस और आरजेडी इस यात्रा से मिले जोश को वोटों में बदल पाएंगे, या फिर नीतीश कुमार और बीजेपी की रणनीति उन्हें पीछे छोड़ देगी? इसका फैसला बिहार की जनता करेगी।

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