UDISE Plus रिपोर्ट दर्शाती है चुनौती और संभावना दोनों की कहानी
🎓 शिक्षा व्यवस्था की मिश्रित तस्वीर
हाल ही में संसद में पेश UDISE Plus 2023‑24 डेटा देश की शिक्षा व्यवस्था की दोहरी चुनौतियों को उजागर करता है। एक ओर सरकारी स्कूलों में नामांकन में भारी गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षा संस्थानों जैसे IIT, AIIMS, IIM, IIIT आदि में प्रवेश रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहे हैं।
📉 सरकारी स्कूलों में नामांकन में गिरावट
UDISE Plus के अनुसार, 2019‑20 में सरकारी स्कूलों में नामांकित छात्र थे 13.09 करोड़, जो 2023‑24 में घटकर 12.74 करोड़ रह गए। इस दौरान लगभग 1.35 करोड़ छात्रों का नामांकन कम हुआ है।
राज्यवार गिरावट:
-
बिहार: 2.10 करोड़ से घटकर 1.74 करोड़
-
उत्तर प्रदेश: 1.90 करोड़ से घटकर 1.58 करोड़
-
राजस्थान: 99 लाख से घटकर 83 लाख
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सबसे ज़्यादा प्रभाव बिहार और यूपी जैसे बड़े राज्यों में पड़ा है।
⛔ ड्रॉपआउट दर में सुधार, लेकिन चुनौतियाँ बरकरार
UDISE Plus 2023‑24 रिपोर्ट के अनुसार ड्रॉपआउट दरें इस प्रकार हैं:
-
प्राथमिक (कक्षा 1‑5): 1.9%
-
उच्च प्राथमिक (कक्षा 6‑8): 5.2%
-
सेकेंडरी (कक्षा 9‑10): 14.1%
हालांकि ये दरें सुधार की ओर संकेत करती हैं, राज्यों में ड्रॉपआउट दरें अभी भी चिंता का विषय हैं। विशेष रूप से बिहार (25.6%), असम (25.1%), मध्य प्रदेश (17.7%) और झारखंड (15.2%) में दरें बेहद उच्च हैं।
💼 उच्च शिक्षा में उछाल: IIT‑AIIMS का विस्तार
सरकार ने उच्च शिक्षा में विस्तार के ज़रिए बड़ी पहल की है:
-
IIT में 7 नए संस्थान (कुल 23)
-
IIM में 8 नए (कुल 21)
-
AIIMS में 12 नए (कुल 19)
-
IIIT में 16 नए (कुल 25)
-
केंद्रीय विश्वविद्यालय: 8 नए (कुल 48)
-
कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी की संख्या: 2018‑19 की 51,649 से बढ़कर 2022‑23 में 60,380 हुई
इन प्रयासों से उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ी है और GER (Gross Enrolment Ratio) में भी सुधार हुआ है।
📊 GER और स्कूल संरचना में बदलाव
राष्ट्रीय स्तर पर GER वृद्धि निम्नानुसार रही :
-
Foundational: 41.9% से 41.5%
-
Preparatory (III–V): 96.9% से 96.5%
-
Middle (VI–VIII): 90% से 89.5%
-
Secondary (IX–XII): 57.1% से 66.5%
इनमें सेकेंडरी में खास सुधार हुआ है, जबकि शुरुआती स्तरों में हल्की गिरावट है।
🏫 बुनियादी सुविधाओं में सुधार, लेकिन अधूरी तस्वीर
UDISE Plus डेटा के मुताबिक:
-
बिजली: 91.8% स्कूलों में
-
पेयजल सुविधा: 98.3%
-
कार्यशील शौचालय: 98%
हालांकि, कम्प्यूटर केवल 57% और इंटरनेट सुविधा 54% स्कूलों में उपलब्ध है।
एकल-शिक्षक विद्यालय की संख्या 2022‑23 में 1,18,190 से घटकर 2023‑24 में 1,10,971 हुई। लेकिन शून्य नामांकन वाले स्कूल की संख्या बढ़कर 12,954 हो गई है
🧑💼 सरकार की उठाए कदम
सरकार ने ड्रॉपआउट रोकने और नामांकन बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए:
-
NIOS, PM‑POSHAN, ICT LABs, रहवासीय विद्यालय, ट्रांसपोर्ट अलाउंस
-
PM-USP स्कॉलरशिप, स्थानीय भाषा में JEE/NEET तैयारी, द्विभाषी ऑनलाइन कोर्स, दोहरी डिग्री सुविधाएँ
-
रिसर्च व इनोवेशन पर जोर – 6,000+ संस्थानों में R&D सेल, 15,000+ इनोवेशन क्लब, SWAYAM पर ऑनलाइन क्रेडिट‑बेस्ड कोर्सेज
इस पर 2025‑26 का एजुकेशन बजट ₹6,490 करोड़ रूपये प्रस्तावित है (वर्तमान वर्ष ₹5,812 करोड़)।
✔️ निष्कर्ष
सरकारी स्कूलों में दर्ज हो रही भारी गिरावट स्पष्ट संकेत है कि गरीब और ग्रामीण बच्चों को शिक्षा क्षेत्र से दूर किया जा रहा है। वहीं उच्च शिक्षा के विस्तार से नया अवसर मिल रहा है, लेकिन यह लाभ अधिकतर बेहतर संसाधन वाले छात्रों तक सीमित है।
सरकार की नीति सुधार व योजना प्रभावी होंगी तभी शिक्षा व्यवस्था में संतुलन लौटेगा। जल्द बचपन से उच्च शिक्षा तक सशक्त, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

