नगर पालिका की बड़ी चूक, गड्ढे पर न बोर्ड, न बैरिकेडिंग | वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) – उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में लापरवाही की वजह से एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बीमार मां को लेकर अस्पताल जा रहे परिवार की कार अचानक सड़क पर बने 11 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी। गनीमत यह रही कि कार में सवार सभी लोग सुरक्षित बच निकले, लेकिन इस घटना ने नगर पालिका प्रशासन और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीमार मां को ले जा रहा था परिवार, रात में हुआ हादसा
घटना सहारनपुर के गंगोह नगर पालिका क्षेत्र की है। गांव जुखेड़ी निवासी वीरेंद्र अपनी बीमार मां को इलाज के लिए कार से गंगोह ले जा रहे थे। उनके साथ उनकी पत्नी, बच्चे और भाई भी मौजूद थे। रात करीब 1 बजे, जब कार डिग्री कॉलेज से गणेश चौक की ओर बढ़ रही थी, तभी अचानक सड़क पर बना गहरा गड्ढा नजर नहीं आया और कार सीधे उसमें जा गिरी।
लापरवाही की इंतहा: न चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह 11 फीट गहरा गड्ढा नगर पालिका के ठेकेदार द्वारा बोरिंग कार्य के लिए खोदा गया था। हैरानी की बात यह रही कि उस स्थान पर कोई चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग नहीं लगाई गई थी। रात के अंधेरे में गड्ढा बिल्कुल दिखाई नहीं दिया, जिससे कार सीधे उसमें समा गई।
ग्रामीणों ने बचाई जान, क्रेन से निकाली गई कार
हादसे के बाद आस-पास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने कार में फंसे सभी लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद बीमार मां को किसी तरह अस्पताल पहुंचाया गया। अगले दिन क्रेन की मदद से कार को गड्ढे से बाहर निकाला गया। यह पूरी घटना वीडियो में रिकॉर्ड हो गई, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
लोगों में गुस्सा, ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग
घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में गहरा आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय पर सावधानी बरती जाती, तो यह हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीणों का कहना है कि यह ठेकेदार की सीधी लापरवाही है, जिसने सड़क पर गड्ढा खोदकर छोड़ दिया और सुरक्षा के कोई भी उपाय नहीं किए।
स्थानीय निवासी रवि कुमार ने कहा, “अगर उस समय कोई बाइक सवार गुजरता, तो उसकी जान भी जा सकती थी। यह घोर लापरवाही है। ठेकेदार और नगर पालिका प्रशासन दोनों दोषी हैं।”
नगर पालिका प्रशासन पर उठे सवाल
घटना के बाद से नगर पालिका प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं कि इतनी बड़ी लापरवाही को कैसे नजरअंदाज किया गया। लोग पूछ रहे हैं कि ठेकेदार द्वारा बिना सुरक्षा उपायों के किए जा रहे कार्यों की निगरानी कौन कर रहा है? क्या नगर पालिका के अधिकारी इस लापरवाही के जिम्मेदार नहीं हैं?
वायरल वीडियो से शुरू हुई चर्चा, जांच की मांग
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने इस पर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। अभी तक किसी अधिकारी या ठेकेदार पर कार्रवाई की जानकारी नहीं मिल पाई है।
निष्कर्ष: लापरवाही से हो सकता था बड़ा नुकसान
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सरकारी ठेकों में लापरवाही और सुरक्षा उपायों की अनदेखी आम बात बनती जा रही है। यदि समय रहते चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग लगाई जाती, तो यह हादसा टल सकता था। यह प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि आगे ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कड़ी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

