छात्रों के लिए जारी किए गए मॉड्यूल में बंटवारे के तीन कारण बताए गए, कांग्रेस सहित कई दलों ने जताया विरोध
नई दिल्ली।
एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा वर्ष 2025 में कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए तैयार किए गए एक विशेष मॉड्यूल ने देश की सियासत को गर्म कर दिया है। इस मॉड्यूल में भारत-पाकिस्तान विभाजन को लेकर जो दावे किए गए हैं, उसने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और एआईएमआईएम जैसी पार्टियों को केंद्र सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है।
क्या कहा गया है एनसीईआरटी के नए मॉड्यूल में?
एनसीईआरटी के इस मॉड्यूल में भारत के विभाजन के लिए तीन मुख्य तत्वों को जिम्मेदार ठहराया गया है:
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मोहम्मद अली जिन्ना ने बंटवारे का सपना देखा,
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कांग्रेस पार्टी ने इसे स्वीकार किया,
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लॉर्ड माउंटबेटन ने बंटवारे को अमल में लाया।
इसके अनुसार, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के नेतृत्व में कांग्रेस ने गृहयुद्ध से बचने के लिए विभाजन को स्वीकार किया। नेहरू के एक कथन का हवाला भी दिया गया है – “या तो विभाजन स्वीकार करें या गृहयुद्ध का सामना करें।” साथ ही लॉर्ड माउंटबेटन पर भी आरोप है कि उन्होंने जल्दबाज़ी में विभाजन की तारीख तय की जिससे सीमांकन और विस्थापन की त्रासदी और गहरी हो गई।
राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
“इस किताब को आग लगा दीजिए। असली जिम्मेदार हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग की मिलीभगत थी। विभाजन के असली दोषी वे हैं जिन्होंने दो राष्ट्र के सिद्धांत को जन्म दिया। इतिहास का सबसे बड़ा दुश्मन आरएसएस है।”
उन्होंने 1937 के अहमदाबाद अधिवेशन और 1940 के लाहौर प्रस्ताव का भी हवाला दिया जिसमें हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग दोनों ने दो राष्ट्र के सिद्धांत को बढ़ावा दिया।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा,
“जिन्ना और राहुल गांधी की सोच एक जैसी है। धर्म के आधार पर भारत को बांटना उनकी विचारधारा रही है। कांग्रेस आज भी जिन्ना की तुष्टिकरण वाली राजनीति करती है।”
ओवैसी की मांग: ‘Muslims Against Partition’ को शामिल करें
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि एनसीईआरटी में ‘Muslims Against Partition’ जैसी किताबों को भी जगह दी जाए ताकि छात्रों को संतुलित और वास्तविक इतिहास पढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा,
“विभाजन के समय मुसलमान बेहद कमजोर स्थिति में थे, समाज की ताकत केवल जमींदारों और रजवाड़ों के पास थी। पूरे समुदाय को दोष देना ऐतिहासिक अन्याय है।”
अखिलेश यादव का तंज
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा,
“बीजेपी की कोई विचारधारा नहीं है। वे सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए हर मुद्दे को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं। आज गरीब, पिछड़े, दलित और आदिवासी सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं।”
क्या कहते हैं इतिहासकार?
इतिहासकारों के एक वर्ग का मानना है कि एनसीईआरटी के इस मॉड्यूल में तथ्यों का सरलीकरण कर दिया गया है। भारत के विभाजन जैसे जटिल विषय को तीन बिंदुओं में समेटना ऐतिहासिक संदर्भों की अनदेखी है। विभाजन के पीछे सांप्रदायिक तनाव, औपनिवेशिक नीतियां, राजनीतिक असहमति और अंतर्राष्ट्रीय दबाव जैसे कई कारक थे।
निष्कर्ष: शिक्षा या सियासत का औज़ार?
एनसीईआरटी के मॉड्यूल पर छिड़ा यह विवाद एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि क्या शिक्षा का राजनीतिकरण हो रहा है? क्या छात्रों को तथ्यात्मक और संतुलित इतिहास पढ़ाया जा रहा है या फिर राजनीतिक दृष्टिकोण थोपे जा रहे हैं?

